सोने के अंडे देने वाली मुर्गी बना इसरो का PSLV लांचर, एक ही दिन में 29 सैटेलाइट लांच कर कमाए 45 करोड़

पीएसएलवी सैटेलाइट लांचर के जरिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) खूब मुनाफा कमा रहा है। दुनियाभर में पीएसएलवी के नाम 28 देशों में एक साथ 209 सैटेलाइट लांच का ट्रेक रिकोर्ड रहा है। इस साल 23 जून को पीएसएलवी-सी38 से 712 किलोग्राम की दो सैटेलाइट्स के साथ 30 अन्य सैटेलाइट्स लांच की गईं थी। इन छोटी सैटेलाइट्स में से एक तमिलनाडू के नूरुल इस्लाम विश्वविद्यालय की थी और अन्य 29 सैटेलाइट अन्य 14 देशों की थी। बुधवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा की कार्रवाई के दौरान कहा था कि 29 विदेशी सैटेलाइट्स के लांच किए जाने से इसरो के अंतरिक्ष कोर्पोरेशन लिमिटिड को 45 करोड़ रुपए का फायदा पहुंचा है।

पीएसएलवी सी37 के जरिए 15 फरवरी को एक साथ 104 सैटेलाइट लांच करने के बाद इसरो एक वर्ल्ड रिकोर्ड बना चुका है लेकिन इसरो ने इसका खुलासा नहीं किया कि इस लांच के बाद एजंसी को कितने रुपयों का फायदा हुआ था। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इन 104 सैटेलाइट्स में 96 अमेरिका की थीं और एक-एक सैटेलाइट भारत, इज़राइल, कजाकिस्तान, नीदरलैंड, स्वीज़रलैंड और यूएई की थीं। अंतरिक्ष में सैटैलाइट्स को लांच करने के लिए अक्सर इस इंडस्ट्र में कई बड़ी कंपनियों का नाम लिया जाता है जिनमें स्पेसएक्सस फैल्कोन9, रूसी प्रोटोन यूएलए और एरियनस्पेस शामिल है। इसरो द्वारा इन छोटी सैटेलाइटस्  के लांच किए जाने के बाद  भारतीय स्पेस एंजसी से विदेशी ग्राहक मिलने में मदद हो रही है।

आपको बता दें कि भारत द्वारा एकसाथ 104 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाने के बाद कई देशों नें इसरो की तारीफ की थी। अमेरिकी स्पेस रिसर्च कंपनी स्पेसवर्क्स ने कहा था कि भारत ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स को लॉन्च करके एक नया किर्तीमान तय किया है जो उसे आने वाले समय इस क्षेत्र में काफी फायदा पहुंचा सकता है। अमेरिकी स्पेस रिसर्च कंपनी स्पेसवर्क्स के मुताबिक अगले पांच सालों में दुनियाभर के कई देश लगभग 3000 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजेंगे। ये सैटेलाइट्स साइज में किसी छोटे से जूते के डब्बे से लेकर 24 इंच के टीवी सेट्स जितने बड़े होंगे।