भारत की कूटनीतिक जीत, इटली के नौसैनिक लौटे
Saturday, 23 March 2013 09:45

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दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इटली के दोनों नौसैनिक अदालती कार्यवाही का सामना करने के लिए शुक्रवार को भारत लौट आए। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच उत्पन्न कूटनीतिक गतिरोध का अंत हो गया।

अपने नौसैनिकों को भारत भेजने के इटली के फैसले की सराहना करते हुए विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने यह कहते हुए कि कूटनीति ने अपना काम किया, इस मामले में किसी किस्म की सौदेबाजी से इनकार किया।

उन्होंने कहा, "हमने कुछ भी नहीं दिया है और खुशी है कि पूरे मुद्दे का समाधान हो गया।"

खुर्शीद ने कहा, "मैं यह साफ करना चाहूंगा कि इस मामले में इटली के साथ कोई सौदा नहीं हुआ है। हमने घटना की प्रकृति के बारे में साफ किया है और यह मृत्युदंड दिए जाने का मामला नहीं है।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी नौसैनिकों को भारत भेजने के रोम के फैसले की सराहना की है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं खुश हूं कि भारतीय न्यायिक प्रक्रिया की अभिन्नता और सम्मान बरकरार रहा। हम इस परिणाम से खुश हैं। मैं नौसैनिकों की भारत वापसी का स्वागत करता हूं।"

दोनों नौसैनिक मैस्सिमिलिआनो लटोर्रे और सल्वाटोरे गिरोने इटली की वायुसेना के विमान से नई दिल्ली पहुंचे।

लोकसभा में दिए गए एक बयान में खुर्शीद ने कहा, "मैं मामले के संतोषप्रद समाधान निकल आने पर खुश हूं। नौसैनिकों के खिलाफ 18 जनवरी 2013 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार मामले की सुनवाई होगी।"

इससे पहले मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, "आप हड़बड़ी में कूटनीति पर नहीं लिख सकते। कूटनीति का काम तब भी जारी रहता है जब हर कोई यह सोचता है कि सबकुछ विफल हो गया। मेहरबानी कर कूटनीति को जो जरूरी है उसे करने के लिए थोड़ा और मौका दीजिए।"

उन्होंने कहा, "सरकार में हम प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर कूटनीति अमल में लाते हैं। हममें से कोई भी इसके लिए श्रेय ले तो वह अशोभनीय होगा।"

मंत्री ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को इस घटनाक्रम से अगले सप्ताह कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक अवगत कराया जाएगा।

खुर्शीद ने कहा, "इटली का कूटनीतिक या विशेषज्ञ स्तरीय वार्ता का या न्यायसीमा के मुद्दे पर विचार या इस मामले को मध्यस्थ या किसी अन्य न्यायिक तंत्र के हवाले करने का आग्रह कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।"

विदेश मंत्री ने कहा, "मैंने यह साफ कर चुका हूं कि रिपब्लिक ऑफ इटली सर्वोच्च न्यालय को अदालत द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर नौसैनिकों की वापसी के संबंध में जताई गई प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए बाध्य है।"

इटली के राजदूत डेनिएल मैन्सिनी ने सर्वोच्च न्यायालय को आरोपी नौसैनिकों के 22 मार्च तक भारत लौट आने का भरोसा दिया था। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 22 फरवरी को दोनों को चुनाव में मतदान करने के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी थी।

इटली ने 11 मार्च को भारत सरकार को सूचित किया कि वह अपने नौसैनिकों को नहीं भेज रहा है जिस लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक विवाद पैदा हो गया और सर्वोच्च न्यायालय ने वादे में विफल इटली के राजदूत के भारत छोड़ने पर पाबंदी लगा दी।

आरोपी नौसैनिक तेल वाहक पोत एमवी एनरिका लैक्सी पर सुरक्षा के लिए तैनात थे। 15 फरवरी को आरोपी नौसैनिकों ने केरल के तट पर मछली पकड़ रहे दो मछुआरों पर समुद्री लुटेरा होने के संदेह में गोलीबारी की। गोलीबारी में दोनों मछुआरे अजेश बिन्की और गैलेस्टिन मारे गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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