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संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत का मत श्रीलंका के खिलाफ
Saturday, 23 March 2013 08:33

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की बैठक में भारत ने गुरुवार को श्रीलंका के विरुद्ध अमेरिका के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 25 और विरोध में 13 मत पड़े।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्विटर पर लिखा, "भारत ने श्रीलंका में राजनीतिक सामंजस्य तथा जवाबदेही तय करने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर यूएनएचआरसी में अपनी मुहर लगा दी।"

प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने वाले देशों में पाकिस्तान भी शामिल है।

भारतीय दूत दिलीप सिन्हा ने अपने बयान में सख्त लहजे में कहा, "हम श्रीलंका द्वारा 2009 में इस परिषद से किए गए अपने वादे को पूरा कर पाने में असफल रहने पर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। इसके बाद हम श्रीलंका से अपनी सार्वजनिक प्रतिबद्धताओं, जिसमें 13वें संशोधन को पूरी तरह लागू करते हुए सत्ता का हस्तांतरण भी शामिल है, के अनुसार कार्रवाई करने तथा उस पर कायम रहने की मांग करते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "हम श्रीलंका से एलएलआरसी की रिपोर्ट में वर्णित सभी रचनात्मक सिफारिशों को समय से तथा प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग करते हैं।"

एलएलआरसी की इस रिपोर्ट में लापता व्यक्तियों, कैदियों, गुमशुदा तथा अपहृत कर लिए गए लोगों, उच्च सुरक्षा क्षेत्रों को घटाए जाने, सेना द्वारा कब्जा किए गए निजी भूमि को लौटाने तथा श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्रों में नागरिकों के रिहायशी इलाकों से सेना हटाए जाने की सिफारिशें की गई हैं।

सिन्हा ने आगे कहा, "हम श्रीलंका में मारे गए निर्दोष नागरिकों तथा मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों के खिलाफ एक स्वतंत्र, अंतर्राष्ट्रीय जांच बिठाने की अपनी मांग को फिर से दोहराते हैं। हम श्रीलंका से जवाबदेही तय करने के लिए जरूरी उपाय किए जाने की अपील करते हैं। हमें आशा है कि इसके लिए अपनाए जाने वाले मानक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अनुकूल होंगे।"

सिन्हा ने अपने वक्तव्य में आगे कहा, "श्रीलंका का सबसे नजदीकी पड़ोसी देश होने के नाते भारत वहां राहत पहुंचाने, पुनस्र्थापना एवं पुनर्वास कार्य तथा पुनर्निमाण के कार्यो में लगातार लगा रहा है। हमारा प्रयास श्रीलंका के अंदर, विशेषकर उत्तरी एवं पूर्वी इलाकों में, विस्थापित हुए लोगों का पुनर्वास करने तथा आधारभूत सुविधाओं को पुनर्निमित करने तथा विकास कार्यो में सहयोग प्रदान करने का रहा है।"

भारतीय दूत ने कहा कि श्रीलंका का हजारों वर्षो से पड़ोसी होने के नाते हम वहां हो रहे विकास से अछूते नहीं रह सकते तथा इस मामले में लगातार अप