श्रीलंका प्रस्ताव का अंतिम प्रारूप नहीं देखा : सरकार
Monday, 18 March 2013 22:23

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नई दिल्ली, 18 मार्च (आईएएनएस)| विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका के खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव का अंतिम प्रारूप सरकार ने अभी नहीं देखा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने संवाददाताओं से कहा, "जब यह प्रस्ताव सामने आएगा तब हम इस पर विचार करेंगे। अभी तक हमने इसका अंतिम प्रारूप नहीं देखा है।"

श्रीलंका के उच्चायुक्त प्रसाद करियावासम ने एक टेलीविजन चैनल से सोमवार को कहा कि उनके देश के खिलाफ प्रस्ताव 'अनावश्यक' है और विश्व समुदाय को इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) का घटक दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने रविवार को इस मसले पर समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी थी।

डीएमके के अध्यक्ष एम. करुणानिधि ने रविवार को कहा था कि यदि केंद्र सरकार ने श्रीलंका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में लाए जाने वाले अमेरिका समर्थित प्रस्ताव में संशोधन के लिए कदम नहीं उठाए तो वह संप्रग से नाता तोड़ लेंगे।

करुणानिधि ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी को शनिवार को पत्र लिख कर केंद्र सरकार से, यूएनएचआरसी में लाए जाने वाले अमेरिकी प्रस्ताव में संशोधन के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।

करुणानिधि चाहते हैं कि यूएनएचआरसी घोषित करे कि श्रीलंकाई सेना और वहां के प्रशासकों ने ईलम तमिलों के खिलाफ नरसंहार और युद्ध अपराध को अंजाम दिया है।

उन्होंने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराध, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के उल्लंघन और तमिल आबादी के नरसंहार के आरोपों की जांच के लिए विश्वसनीय और स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय आयोग के गठन की पुरजोर मांग की है।

लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ संघर्ष के आखिरी चरण में 2009 में बड़े पैमाने पर तमिल नागरिकों के संहार के लिए श्रीलंका निशाने पर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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