इतालवी नौसैनिकों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला शुक्रवार को
Thursday, 25 April 2013 17:03

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सर्वोच्च न्यायालय दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इतालवी नौसैनिकों पर कानून की कठोर धारा लगाने तथा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को घटना की जांच सौंपने के खिलाफ इटली की सरकार की याचिका पर फैसला शुक्रवार को सुनाएगा। सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर, न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे तथा न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की पीठ ने इटली सरकार की याचिका पर निर्णय शुक्रवार तक यह कहते हुए टाल दिया कि वह चाहती है कि महान्यायवादी सी. ई. वाहनवती फैसला सुनाते वक्त न्यायालय में मौजूद रहें।

अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने हालांकि कहा कि वह न्यायालय के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन न्यायालय ने कहा कि वह वाहनवती की मौजूदगी में ही फैसला सुनाएगा।

इस मामले पर न्यायालय का आदेश सोमवार को ही आना था, जिसे पहले गुरुवार तक टाला गया और अब शुक्रवार तक।

इतालवी सरकार की दलील है कि उसके दो नौसैनिकों के खिलाफ सप्रेशन ऑफ अनलॉफुल एक्ट्स अगेंस्ट सेफ्टी ऑफ मैरिटाइम नेविगेशन एंड फिक्स्ड प्लेटफॉर्म्स ऑन कांटीनेंटल शेल्फ एक्ट (एसयूए), 2002 के तहत आरोप लगाए गए हैं। यदि उन्हें इसके तहत दोषी ठहराया जाता है तो नौसैनिकों को निश्चित तौर पर मौत की सजा होगी, जो इस कानून के तहत अनिवार्य सजा है।

भारत सरकार ने हालांकि इटली को आश्वासन दिया था कि यदि उसके दो नौसैनिक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर लौट आते हैं, तो उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा। इतालवी नौसैनिकों की 22 मार्च को भारत वापसी के बाद विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने यह बात संसद में भी कही थी। लेकिन इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ एसयूए के तहत आरोप लगाए गए हैं और जांच एनआईए को सौंपी गई है। इसके बाद ही इटली की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

इटली के दो नौसैनिकों- मेसिमिलानो लाटोरे और सेल्वाटोरे जिरोने पर 15 फरवरी, 2012 को केरल से सटे अरब सागर में दो भारतीय मछुआरों को समुद्री लुटेरे समझ कर मार डालने का आरोप है। दोनों सैनिक इतालवी तेल वाहक पोत एनरिका लेक्सी पर सुरक्षाकर्मियों के रूप में तैनात थे।

दोनों को सर्वोच्च न्यायालय ने इटली के आम चुनाव में मतदान के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी थी, जिसके बाद इटली सरकार ने दोनों को वापस भेजने से इंकार कर दिया था। नौसैनिकों की वापसी को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध पैदा हो गया था। अंतत: भारी दबाव के बाद दोनों नौसैनिक 22 मार्च को भारत लौटे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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