वैक्सीन सुरक्षित साबित होने पर ही जारी की जाएगी : सीरम इंस्टीट्यूट
Tuesday, 01 December 2020 20:47

  • Print
  • Email

चेन्नई: कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट इंडिया ने मंगलवार को कहा कि कोविडशील्ड वैक्सीन को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तब तक जारी नहीं किया जाएगा, जब तक कि यह इम्युनोजेनिक और सुरक्षित साबित न हो जाए। कंपनी ने यह भी कहा कि गंभीर प्रतिकूल घटना (एसएई), जो कथित तौर पर शहर आधारित स्वयंसेवक के साथ हुई, वह वैक्सीन से प्रेरित नहीं है।

सीरम संस्थान ने इससे पहले कहा कि वह उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले स्वयंसेवक पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की मानहानि का दावा करेगा। कंपनी ने कहा कि उसे स्वयंसेवक की चिकित्सा स्थिति को लेकर सहानुभूति है और यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

कंपनी ने कहा, "हालांकि, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि सभी अपेक्षित विनियामक और नैतिक प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का पालन और सख्ती से किया गया।"

बता दें कि हाल ही में एक वॉलंटियर ने इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड वैक्सीन से गंभीर साइड-इफेक्ट होने का दावा कर सभी को चौंका दिया था।

वॉलंटियर के कोवीशील्ड वैक्सीन से गंभीर साइड-इफेक्ट होने के दावे के बाद सीरम इंस्टीट्यूट ने मंगलवार को बयान जारी किया। सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा कि चेन्नई के वॉलंटियर के साथ कोई हादसा नहीं हुआ और ट्रायल में सभी प्रक्रियाओं और दिशानिर्देशों का पालन किया गया है।

सीरम इंस्टीट्यूट के अनुसार, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, डेटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड (डीएसएमबी) और एथिक्स कमेटी ने कहा कि वैक्सीन के ट्रायल में उसकी स्थिति के साथ कोई संबंध नहीं है।

कंपनी ने कहा, "हमने घटना से संबंधित सभी रिपोर्ट और डेटा डीसीजीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) को सौंपे हैं। यह केवल उन सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को क्लीयर करने के बाद है, जिन्हें हमने परीक्षण के साथ जारी रखा।"

कंपनी ने कहा कि टीकाकरण के बारे में जटिलताओं और मौजूदा गलत धारणाओं को ध्यान में रखते हुए कानूनी नोटिस भेजा गया है, ताकि कंपनी की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखा जा सके।

शहर के 40 वर्षीय स्वयंसेवक, जो एक व्यावसायिक सलाहकार के रूप में काम करते हैं, उन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से तैयार की गई कोविशील्ड का डोज लेने पर गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य जटिलताओं की बात कही थी।

स्वयंसेवक के अधिवक्ताओं के अनुसार, उनके मुवक्किल को 29 सितंबर को टीका लगाया गया था, जिसके बाद उसे गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हुईं। इसके बाद इसके कारण की जांच करने और परीक्षणों को रोकने के बजाय सीरम इंस्टीट्यूट और अन्य ने चुप्पी साधे रखी।

अधिवक्ता एन.जी.आर. प्रसाद ने आईएएनएस को बताया, "हमें सीरम इंस्टीट्यूट सहित विभिन्न पक्षों को भेजे गए कानूनी नोटिस के लिए अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। हमने सीरम इंस्टीट्यूट के बारे में आई खबरें पढ़ी हैं। हमने पाया कि हमारे मुवक्किल को 100 करोड़ रुपये से अधिक का मामले दायर करने की धमकी दी जा रही है।"

--आईएएनएस

एकेके/एसजीके

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

Don't Miss