G-20 Summit : जी-20 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी बोले- टेक्‍नोलॉजी के मूल्‍य को मानवता के पैमाने पर मापा जाए
Saturday, 21 November 2020 16:51

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नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-20 के 15वें शिखर सम्मेलन में शामिल हुए हैं। सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने प्रधानमंत्री मोदी को न्‍यौता दिया था। यह 2020 में जी-20 नेताओं की दूसरी बैठक है। इस शिखर सम्मेलन की थीम सभी के लिए '21वीं सदी के अवसरों का अनुभव' है। यह सम्मेलन वर्चुअल फार्मेट में हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काम करने वाले लोगों की गरिमा को मजबूती देने के साथ टैलेंट पूल बनाया जाना चाहिए। यही नहीं नई प्रौद्योगिकियों के मूल्य की माप मानवता में इसके योगदान के आधार पर किया जाना चाहिए। हमारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता समाज को सामूहिक रूप से और आत्मविश्वास के साथ संकट से लड़ने के लिए प्रेरित करने में मदद करती है। धरती के प्रति भरोसे की भावना हमें स्वस्थ और समग्र जीवन शैली के लिए प्रेरित करेगी। 

प्रधानमंत्री ने इस बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जी-20 नेताओं के साथ बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ओर से किए गए समन्वित प्रयासों से निश्चित तौर पर इस महामारी से निजात मिलेगी। मैंने इस शिखर सम्मेलन में प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और भरोसे के आधार पर एक नया वैश्विक सूचकांक विकसित करने की जरूरत को सामने रखा।

सऊदी अरब विश्व की प्रमुख 20 अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 का मौजूदा अध्यक्ष है। बीते दिनों सऊदी अरब ने कहा था कि यह शिखर सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा। माना जा रहा है कि इस शिखर सम्मेलन में जी-20 एक आर्थिक राहत कार्यक्रम पेश कर सकता है। शिखर सम्मेलन कोरोनो महामारी के प्रभावों, भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के मसलों पर केंद्रित रहेगा।

इस बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्केल और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एवं अन्य देशों के नेता भाग ले सकते हैं। हालांकि इस बार यहां पहले की तरह भौतिक चमक दमक नहीं नजर आएगी।   

इस बार वचुअल माध्‍यम से आयोजित हो रहे सम्‍मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के बीच बंद कमरों में होने वाली बैठकें भी नहीं हो रही हैं। हाल ही में डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडहानॉम घेब्रेयस ने कहा था कि जी-20 शिखर सम्मेलन के नेताओं के पास कोरोना के इलाज और टीकों की समान पहुंच सुनिश्चित करने का सुनहरा मौका है। सम्‍मेलन में क्‍लाइमेट चेंज के मसले पर भी चर्चा की उम्‍मीद है। 

जी-20 के सदस्‍यों में अर्जेंटीना, आस्‍ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, रूस, सऊदी अरब, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं। सऊदी अरब पहली बार इस सम्‍मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह भी माना जा रहा है कि कोरोना महामारी के चलते ध्वस्त अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए जी-20 सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा।

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