'इतालवी नौसैनिकों को न्यायालय में वर्दी में पेश होना चाहिए'
Wednesday, 17 April 2013 09:46

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रोम, 16 अप्रैल (आईएएनएस)| एक इतालवी कानूनी विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत में दो मछुआरों की हत्या के आरोप का सामना कर रहे दोनों इतालवी नौसैनिकों को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में पेशी के समय नौसेना की अपनी वर्दी में रहना चाहिए।

रोम स्थित इंटरनेशनल अफेयर्स इंस्टीच्यूट में अंतर्राष्ट्रीय कानून के अध्यापक नेटालिनो रोंजिट्टी ने कहा, "इसका कारण यह है कि उन्हें इस बात पर जोर देना है कि वे सैनिक हैं और इस नाते वे इतालवी सरकार के अंग हैं।"

उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी समस्या न्यायसीमा की है।"

उन्होंने कहा, "इटली का कहना है कि यह मामला भारत की न्याय सीमा में नहीं आता और उसके दोनों सैनिकों को अपनी भूमिका में प्रतिरक्षा हासिल है।"

मेसिमिलानो लाटोरे और सेल्वाटोरे जिरोने नामक दो इतालवी नौसैनिकों ने फरवरी 2012 में केरल के समुद्री तट पर दो भारतीय मछुआरों को समुद्री लुटेरा समझ कर मार डाला था। दोनों सैनिक इतालवी तेल वाहक पोत पर सुरक्षा में तैनात थे।

दोनों को सर्वोच्च न्यायालय ने इटली के आम चुनाव में मतदान के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी थी, जिसके बाद इटली सरकार ने दोनों को वापस भेजने से इंकार कर दिया था।

नौसैनिकों की वापसी को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध पैदा हो गया था। अंतत: भारी दबाव के बाद दोनों नौसैनिक भारत लौटे। नौसैनिकों की भारत वापसी के फैसले से नाराज इटली के विदेश मंत्री गिउलियो तेरजी ने इस्तीफा दे दिया।

भारत ने इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ मामले की सुनवाई के लिए नई दिल्ली में विशेष अदालत का गठन किया है और भारत सरकार ने इटली सरकार को आश्वासन दिया है कि दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग नहीं की जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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