एनआईए के हाथ लगे आईएसआई के यूपी लिंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज
Tuesday, 30 June 2020 06:37

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उत्तर प्रदेश के एक युवक द्वारा कथित तौर पर भारतीय सेना की सूचना पाकिस्तान के अपने आईएसआई हैंडलर्स को देने के मामले में राज्य में तीन जगहों पर छापे मारे। उत्तर प्रदेश आतंक रोधी दस्ते (एटीएस) ने मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) के साथ मिलकर जनवरी में मोहम्मद राशिद (23) को गिरफ्तार किया था। वह वाराणसी के चंदौली का रहने वाला है और कथित रूप से मार्च 2019 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था।

केंद्र सरकार को उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की सूचना मिली। इसके बाद गृह मंत्रालय ने इस वर्ष अप्रैल में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने मुगलसराय, चंदौली और वाराणसी में उसके ठिकानों पर छापे मारे और एक मोबाइफ फोन व आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए।

एमआई को राशिद के बारे में जुलाई 2019 को जानकारी मिली थी, जिसके बाद उसे विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। एमआई ने कई महीनों से उसपर नजर रखी थी।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि वह अपने माता पिता के तलाक लेने और पिता के दूसरी महिला से शादी करने के बाद वाराणसी जिले में अपने दादा और चाचा के साथ रह रहा था।

उसके रिश्तेदार कराची में रहते हैं और विवाह समारोह में शामिल होने के लिए वह दो बार, 2017 और 2018-19 में वहां गया था।

कराची में वह अपनी चाची हसीना, उसके पति शागिर अहमद और उनके बेटे शाजेब के साथ टिका था। जब वह दूसरी बार वहां गया तो शाजेब ने उसे आईएसआई-पाकिस्तानी सेना के दो लोगों से मिलाया, जिन्होंने अपनी पहचान उसे आशिम और अमद के रूप में कराई।

दोनों ने राशिद को अपने विश्वास में लिया और उसे भारतीय आर्मी यूनिट के मूवमेंट के फोटो/वीडियो/सूचना और उनके काम आने वाले भारतीय वाट्सएप नंबर देने का काम सौंपा। उसे भारत के संवेदनशील जगहों और रैलियों के बारे में जानकरी देने के लिए कहा गया।

उन्होंने राशिद को पैसे देने का वादा किया और कहा कि वे कराची में उसकी कजिन से विवाह कराने में उसकी मदद करेंगे। उसके बाद से वह लगातार उनके संपर्क में बना रहा।

सूत्रों के अनुसार, राशिद ने भारत वापस आने के बाद आशिम और अमद को दो भारतीय मोबाइल नंबर के वनटाइम पासवर्ड मुहैया कराए, ताकि वे भारतीय नंबर पर वाट्सएप प्रोफाइल बना सकें। इन वाट्सएप नंबरों का बाद में पाकिस्तानी एजेंसियों ने इस्तेमाल भारतीय रक्षा कर्मियों को ट्रैप करने के लिए किया।

सूत्रों ने कहा कि अपने पाकिस्तानी आकाओं को वाट्सएप नंबर मुहैया कराने के अलावा उसने संवेदनशील इलाकों के कई फोटो और वीडियो भेजे।

इनमें काशी विश्वनाथ मंदिर, एयरफोर्स सेलेक्शन बोर्ड, ग्यानवापी मस्जिद, संकट मोचन मंदिर, कैंट रेलवे स्टेशन, वाराणसी का दशाश्वेमेध घाट, आगरा फोर्ट, दिल्ली में इंडिया गेट इत्यादि के फोटो और वीडियो शेयर किए।

सूत्रों ने कहा कि उसे पाकिस्तानी हैंडलर्स से उपहार के रूप में मई 2019 में हरे और सफेद रंग का टीशर्ट मिला वहीं जुलाई 2019 में 5000 रुपये मिला।

इसके अलावा राशिद ने इन दोनों पाकिस्तानी हैंडलर्स के बॉस से अक्टूबर-नवंबर 2009 में बातचीत की, जिसने उसे जोधपुर में सैन्य प्रतिष्ठान के पास एक दुकान खरीदने को कहा ताकि आर्मी की मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। उसे एक लाख रुपये और रूम रेंट के रूप में माहवार 10,000-15000 रुपये देने का आश्वासन दिया गया।

--आईएएनएस

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