प्रधानमंत्री से मिले बादल, मांगा भुल्लर के लिए उम्रकैद
Tuesday, 16 April 2013 10:33

  • Print
  • Email

पंजाब के सत्तारूढ़ दल शिरोमणि अकाली दल ने सोमवार को प्रधानमंत्री से भुल्लर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। अकाली दल ने प्रधानमंत्री से भुल्लर की मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील करने की मांग की। दिल्ली में 1993 में हुए बम विस्फोट कांड के लिए दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को सर्वोच्च न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई है।

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल एवं उप मुख्यमंत्री और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोमवार की सुबह दिल्ली में प्रधानमंत्री से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की।

एक प्रवक्ता ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वह भुल्लर की फांसी की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए तथा उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से संपर्क करें।

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह भुल्लर की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने के लिए दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया था। यह याचिका इस आधार पर दाखिल की गई थी कि भुल्लर की क्षमायाचना पर राष्ट्रपति द्वारा लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

अकाली दल नेताओं ने प्रधानमंत्री को दिए गए ज्ञापन में कहा है, "इस प्रक्रिया को ऐसी राह खोजने के लिए अवश्य शुरू किया जाना चाहिए जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्याय के उद्देश्य और राष्ट्र के दीर्घकालिक हितों एवं इतने संवेदनशील मुद्दे पर शासनाध्यक्ष के दृष्टिकोण और उद्देश्य के बीच विवाद न पैदा हो।"

अकाली दल के ज्ञापन में आगे कहा गया है, "समग्र राष्ट्रहित की दृष्टि से तथा सामान्यत: देश में और विशेषकर पंजाब में शांति एवं सांप्रदायिक सद्भाव के हित में इस मामले में मौत की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील किया जा सकता है।"

अकाली दल के ज्ञापन में राष्ट्रपति से भुल्लर को प्राणदंड से बचाने के लिए 'शासनाध्यक्ष की भांति हस्तक्षेप' करने की मांग की गई है।

जेल अधिकारियों एवं चिकित्सकों ने बताया कि भुल्लर का दिल्ली में मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान चिकित्सा संस्थान (आईएचबीएएस) में मानसिक उपचार चल रहा है।

बादल ने पंजाब में न्याय व्यवस्था बने रहने का आश्वासन दिया।

प्रवक्ता ने कहा, "दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री को इस मामले के सभी पहलुओं से अवगत कराया। इस दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहनी चाहिए और इसे समाज के प्रत्येक व्यक्ति एवं प्रत्येक तबके के लिए समान रूप से देखा जाना चाहिए। न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी पड़ना चाहिए।"

ज्ञापन में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश द्वारा भुल्लर की मौत की सजा को बरकरार रखने के फैसले में व्यक्त की गई असहमतियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

Don't Miss