अमित शाह को फर्जी मुठभेड़ मामले में राहत
Monday, 08 April 2013 16:25

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महासचिव व गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह को सोमवार को एक बड़ी राहत मिली, जब सर्वोच्च न्यायालय ने तुलसीराम प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में उनके खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी। न्यायालय ने कहा कि इस प्राथमिकी के आधार पर जो आरोप-पत्र दाखिल किया गया था, उसे सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में अनुपूरक आरोप-पत्र के रूप में देखा जाएगाा, जिसकी सुनवाई मुंबई में हो रही है।

तुलसीराम प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई की प्राथमिकी रद्द करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. सथशिवम और न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान की पीठ ने कहा कि यह सीबीआई की अपनी सोच थी कि तुलसी राम प्रजापति की हत्या, सोहराबुद्दीन शेख तथा उसकी पत्नी कौसरबी के अपहरण के बाद श्रृंखलाबद्ध तरीके से हुई हत्याओं से सम्बंधित लेनदेन का ही एक हिस्सा था।

न्यायालय ने कहा कि किसी आरोपी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और पुलिस के जांच के व्यापक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति सथशिवम ने निर्णय सुनाते हुए कहा, "हमारा मानना है कि दूसरी प्राथमिकी दर्ज किया जाना संविधान के अनुच्छेद 14, 20 और 21 का उल्लंघन है।"

यह मामला नवंबर 2005 में कथित तौर पर गुजरात पुलिस द्वारा की गई सोहराबुद्दीन शेख की हत्या से जुड़ा है, जिसके बारे में पुलिस का कहना है कि वह हथियारों की तस्करी तथा आतंकवादी हमलों की साजिश करने में शामिल था। शेख और उसकी पत्नी कौसरबी को आंध्र प्रदेश में हैदराबाद जाते वक्त महाराष्ट्र के सांगली से अगवा कर लिया गया था और कथित तौर पर दोनों की हत्या कर दी गई थी।

एक साल बाद 26 दिसंबर, 2006 को शेख के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को भी कथित तौर पर पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, जो शेख तथा उसकी पत्नी की हत्या के मामले में गवाह था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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