एसएफआई नेता की मौत के खिलाफ फेसबुक पर उबाल
Monday, 08 April 2013 11:27

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पश्चिम बंगाल में पुलिस अभिरक्षा में छात्र नेता सुदीप्त गुप्ता की मौत पर 'नेटिजेंस' (इंटरनेट पर सक्रिय रहने वाले लोग) हैरान हैं। 'नेटिजेंस' ने सोशल साइट फेसबुक पर अपने गुस्से का इजहार किया है।

कोलकाता की सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में शामिल, फेसबुक सदस्यों ने अपने पेज पर एसएफआई (स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) नेता सुदीप्त गुप्ता की मौत पर श्रद्धांजलि के रूप में मोमबत्ती जलाई है।

शन्नू गोगोल चक्रवर्ती ने फेसबुक पर लिखा, "एक युवा नेता जो बॉब डिलन को सुना करता था.. कबीर सुमन के गीतों को पसंद करता था.. सलिल चौधरी द्वारा उसे बुरी तरह प्रताड़ित किया गया था.. राजनीतिक दिग्गजों, आपको इससे क्या, आप तो अपने आरोप-प्रत्यारोप के खेल खेलते रहो।"

एक एमबीए छात्रा सौम्या मुखर्जी ने कोलकाता में हुई इस घटना पर अफसोस जताते हुए फेसबुक पर बर्तोल्त ब्रेख्त का मशहूर उद्धरण पोस्ट किया : "सबसे पहले वे कम्युनिस्टों के लिए आए, मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था। फिर वे समाजवादियों के लिए आए, और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं समाजवादी नहीं था। फिर वे ट्रेड यूनियन से जुड़े लोगों के लिए आए और मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मैं ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता नहीं था। तब वे मेरे लिए आए और वहां मेरे लिए बोलने वाला कोई नहीं बचा था।"

कुछ सदस्य गुप्ता की मौत के लिए ममता सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं और कटघरे में खड़ा करते हैं।

कुछ लोगों ने मृतक की तस्वीर के साथ अपना विरोध दर्ज कराया है। फेसबुक पर गुप्ता की तस्वीरें उन्हें पढ़ते और लिखते हुए दिखाती हैं।

कॉमरेड समर्थकों का आरोप है कि गुप्ता की मौत पुलिस द्वारा बेंत से पिटाई किए जाने के बाद हुई। इसका परिणाम ये हुआ है कि एक लैंप पोस्ट से अपना सिर लहूलुहान कर लिया।

उधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि यह एक दुर्घटना थी।

गौरतलब है कि बीते मंगलवार को कोलकाता में कथित तौर पर पुलिस अभिरक्षा में सुदीप्त की मौत हो गई थी। गुप्ता मार्क्‍सवादी पार्टी (माकपा) की छात्र इकाई एसएफआई का समर्पित नेता था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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