पेपरेक्स में तय होगा सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर कागज के प्रयोग का खाका
Saturday, 30 November 2019 08:59

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नई दिल्ली: पल्प, पेपर एवं अन्य संबंधित उद्योगों के 14वें अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस एवं एक्जीबिशन-पेपरेक्स 2019 का आयोजन 3 से 6 दिसंबर तक प्रगति मैदान में होगा। इस क्षेत्र में एशिया का यह सबसे बड़ा आयोजन मुख्यरूप से सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर पेपर एवं पेपरबोर्ड के प्रयोग को बढ़ावा देने वाली टेक्नोलॉजी पर केंद्रित रहेगा। कॉन्फ्रेंस का आयोजन भारत में पेपर इंडस्ट्री की संस्था-इंडियन एग्रो एंड रीसाइकिल्ड पेपर मिल्स एसोसिएशन (आईएआरपीएमए) के जर्नल इन पेपर इंटरनेशनल द्वारा किया जा रहा है। इस दौरान भारत सरकार के माननीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

आईएआरपीएमए के महासचिव पी.जी. मुकुंदन ने कहा, "पेपरेक्स ने भारत के 70,000 करोड़ रुपये के कागज उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह एकमात्र ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां भारतीय कागज उद्योग के सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करने की अपील को ध्यान में रखते हुए पेपरेक्स 2019 में इसके ईको-फ्रेंडली विकल्प पर विमर्श किया जाएगा।"

इस मौके पर इंडियन पेपर मैन्यूफैक्च र्स एसोसिएशन (आईपीएमए) के प्रेसिडेंट ए.एस. मेहता और इंडियन न्यूजप्रिंट मैन्यूफैक्च र्स एसोसिएशन (आईएनएमए) के प्रेसिडेंट पी. एस. पटवारी पेपर एवं न्यूजप्रिंट इंडस्ट्री की स्टेटस रिपोर्ट जारी करेंगे। पेपरेक्स 19 की टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन और आईपीएमए के पूर्व प्रेसिडेंट एन. गोपालरत्नम इस मौके पर संबोधन करेंगे।

मुकुंदन ने कहा, "उभरती हुई नई लाइफस्टाइल और ईको-फ्रेंडली पैकेजिंग की जरूरतों को देखते हुए क्राफ्ट एवं पेपर बोर्ड, राइटिंग एवं प्रिंटिंग पेपर, टिश्यू आदि के क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। इसलिए भारतीय उद्योग को अपनी क्षमता बढ़ाने एवं इस अवसर को भुनाने के लिए पर्याप्त कच्चे माल की आपूर्ति और नवीनतम टेक्नोलॉजी की जरूरत होगी। तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में दुनियाभर की नवीनतम एवं किफायती टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया जाएगा।"

कागज उद्योग में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। ग्राहक अब नॉन-बायोडिग्रेडेबल विकल्पों के बजाय कागज को प्राथमिकता देने लगे हैं, ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक के बजाय कागज का विकल्प सुगम रहे। ग्राहकों के इस बदलते रुख के कारण कागज की मांग 2025 तक मौजूदा 1.85 करोड़ टन से बढ़कर 2.5 करोड़ टन हो जाने का अनुमान है।

--आईएएनएस

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