प्रधानमंत्री पद के प्रति उदासीन राहुल ने अधिकारिकता पर दिया जोर
Friday, 05 April 2013 17:29

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को इस बात को खारिज किया कि वह प्रधानमंत्री पद के दावेदारों की होड़ में हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य करोड़ों भारतीयों की आवाज बनना और समग्र विकास के लिए संघर्ष करना है। अगले आम चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किए जाने की अटकलों को खारिज करते हुए राहुल ने कहा, "यह अप्रासंगिक सवाल है। यह सब धुआं है। प्रासंगिक सवाल सिर्फ लोगों की आवाज उठाना है।"

राहुल गुरुवार को होटल अशोक के वैंक्वेट हॉल में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक सम्मेलन में मौजूद उद्योगपतियों और व्यापारियों को संबोधित कर रहे थे। इसी वर्ष 19 जनवरी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद 42 वर्षीय राहुल पहली बार उद्योग जगत के प्रमुखों से मुखातिब हुए।

इस सम्मेलन को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को संबोधित किया था।

राहुल ने कहा, "कई लोग मेरे प्रधानमंत्री बनने की संभावना के बारे में भविष्यवाणी करते हैं और यह कि मैं कब शादी करूंगा आदि-आदि। ये सारी बातें अप्रासंगिक हैं। सबसे ज्यादा जरूरी करोड़ों लोगों की आवाज उठाना है। हमें खुद को ज्यादा जरूरी मुद्दों, जैसे- भ्रष्टाचार, विकास से वंचित और असंगत राजनीतिक ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि कोई भी अकेले अपने दम पर देश की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता।

राहुल ने कहा, "यदि आप यह सोचते हैं कि घोड़े पर सवार एक नौजवान आएगा और सभी चीजों को दुरुस्त कर देगा तो यह नहीं होने जा रहा।"

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी किसी चमत्कार की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

सरकार के बोझिल तंत्र पर सवाल खड़ा करते हुए राहुल ने कहा कि प्रधान की तरह लोगों के बहुत से नेता महत्व से वंचित हैं या फिर उन्हें नीति निर्धारण वाली राजनीतिक प्रक्रिया में उनकी राय के लिए कोई स्थान नहीं है।

इसे बेहद निराश करने वाली बात करार देते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने उद्योग जगत से विकास को आगे बढ़ाने में सरकार का साझीदार बनने का आह्वान किया और व्यापारी समुदाय से 'बुद्धिमान हस्तक्षेप' का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "मैं आप पर भरोसा करता हूं। भारत को आगे ले जाने के लिए मैं आपके साथ साझेदारी करना चाहता हूं।" इसके लिए राहुल ने उनसे साफ सुथरा, नियमबद्ध सरकारी तंत्र देने का वादा किया।

हिंदुत्व विचारधारा को खारिज करते हुए राहुल ने अपने समाजवादी पक्ष को सामने रखा।

उन्होंने कहा, "मैं लोगों को बाहर निकालने को पसंद नहीं करता। आप मुंबई से बिहारियों को नहीं निकाल सकते या तंत्र से मुस्लिमों को बाहर नहीं कर सकते। यह टिकाऊ नहीं होगा।"

"अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक, वंचित और महिलाएं सभी समाजिक ढांचे के महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और हमें इन तक संवेदना और सहानुभूति के साथ पहुंचना चाहिए।"

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के भावी अध्यक्ष एस. गोपालकृष्णन ने कहा, "यह बातचीत काफी अच्छी रही। इसने बातचीत का मार्ग खोला है। उन्होंने कई मुद्दों पर विस्तार से बात की।"

गोपालकृष्णन ने कहा कि बातचीत उम्मीद के अनुरूप रही। उन्होंने कहा, "कारोबारियों के साथ यह उनकी पहली मुलाकात थी और वे उम्मीदों पर खरे उतरे।"

सीआईआई के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने कहा कि गांधी के विचार बेहतरीन थे और उनसे सरकारी और उद्योग को एक साथ काम करने की प्रेरणा मिलती है।

गोदरेज ने कहा, "राहुल गांधी से पूर्ण सत्र में अपने विचार रखने के लिए अनुरोध किया गया था, जिसे उन्होंने बेहतरीन तरीके से अंजाम दिया। मुझे लगता है कि श्रोताओं ने इसे पूरी तरह स्वीकार किया है।"

बजाज समूह के अध्यक्ष राहुल बजाज ने कहा कि उद्योगपतियों ने मंत्रमुग्ध होकर उनका भाषण सुना।

बजाज ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि उन्होंने खुद को महंगाई या वित्तीय घाटे तक सीमित रखा। वह सरकार में नहीं हैं। यह उनका काम नहीं है। उन्हें लोगों की चिंता है। उन्होंने सहिष्णुता, समरसता और मेलजोल के साथ काम करने पर चर्चा की।"

भारती समूह के अध्यक्ष सुनील भारती मित्तल ने कहा कि भाषण प्रेरणास्पद था।

मित्तल ने कहा, "यह एक लाजवाब भाषण था.. वह प्रौद्योगिकी और समावेशीकरण के महत्व को समझते हैं, जिससे एक भावी नेता की उम्मीद जगती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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