मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ आरएसएस की इकाई में हलचल शुरू
Thursday, 10 October 2019 18:10

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के खिलाफ 10 दिनों के राष्ट्रव्यापी विरोध की घोषणा की है। 16 देशों का नि:शुल्क व्यापार समझौता (एफटीए) सभी जिला केंद्रों में 10 से 20 अक्टूबर के बीच होगा।

स्वदेशी जागरण मंच ने यह भी घोषणा की कि यह प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन प्रस्तुत करेगा।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) छह नि:शुल्क व्यापार समझौते (एफटीए) साझेदार देशों भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ 10 आसियान देशों का एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है।

इस संधि के उद्देश्यों में माल और सेवाओं के व्यापार के साथ-साथ निवेश, बौद्धिक संपदा और विवाद का समाधान करना शामिल हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इकाई स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने मांग करते हुए कहा है कि सरकार को चाहिए कि वह क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) पर हस्ताक्षर न करे। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यह वर्तमान और भावी पीढ़ियों को बेरोजगारी और गरीबी की ओर धकेल देगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विंग ने एफटीए के प्रदर्शन पर सरकार द्वारा कराए गए अध्ययनों को तुरंत प्रकाशित करने और एफटीए पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट को अंतिम रूप देने व प्रकाशित करने की भी मांग की है।

कृषिमंत्री नरेंद्र तोमर, कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, इस्पात मंत्री धर्मेद्र प्रधान, खनन व खनिज मंत्री प्रहलाद पटेल के नेतृत्व वाले मंत्रालयों ने किसानों और घरेलू उद्योग के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए पहले ही इस सौदे का विरोध किया है।

स्वदेशी जागरण मंच ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "वर्तमान में देश विनिर्माण और कृषि दोनों ही मोर्चो पर संकट का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप नौकरियों की हानि हो रही है।"

--आईएएनएस

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