थोक मूल्य सूचकांक घटकर 1.08 फीसदी
Wednesday, 14 August 2019 22:32

  • Print
  • Email

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी और खाने-पीने के सामान की कीमतों में नरमी से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति की सालाना दर जुलाई में गिरकर 1.08 फीसदी रही, जोकि जून में 2.02 फीसदी पर थी, जबकि जुलाई 2018 में इसकी दर 5.27 फीसदी थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों से पता चलता है कि मासिक डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति की सालाना दर जुलाई में 1.08 फीसदी (अनंतिम) रही, जबकि पिछले महीने यह 2.02 फीसदी थी और पिछले साल के जुलाई में 5.27 फीसदी थी।

वित्त वर्ष 2019-20 का बिल्ट अप मुद्रास्फीति दर 1.08 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले की इसी अवधि में यह 3.1 फीसदी थी।

क्रमिक आधार पर, प्राथमिक वस्तुएं, जिसका डब्ल्यूपीआई सूची में भार 22.62 फीसदी है, पर खर्च बढ़कर 6.72 फीसदी से 5.03 फीसदी हो गया।

खाने-पीने के सामानों की कीमतें धीमी गति से बढ़ीं और 6.98 फीसदी से बढ़कर 6.15 फीसदी हो गई हैं। ईंधन और बिजली पर खर्च (जिसका भार 13.15 फीसदी है) घटकर 2.20 फीसदी से 3.64 फीसदी हो गई।

साल-दर-साल आधार पर प्राथमिक वस्तुओं पर खर्च 2.04 फीसदी से बढ़कर 5.03 फीसदी हो गया। वहीं, दूसरी तरफ खाने-पीने के सामानों की कीमतें तेजी से बढ़ी और नकारात्मक 2.1 फीसदी से बढ़कर 6.15 फीसदी हो गईं।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) जुलाई में बढ़कर 2.36 फीसदी रहा, जबकि जून में 2.25 फीसदी और जुलाई 2018 में 1.30 फीसदी पर था।

आईसीआरए की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, "कोर मुद्रास्फीति में उम्मीद से अधिक 0.2 फीसदी की गिरावट के कारण ही जुलाई 2019 के लिए डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति में कमी आई है, जो कि हमारे अनुमान 1.9 फीसदी से कम है।"

उन्होंने कहा, "कमोडिटी की कीमतों में नरमी, रुपये के हल्के अभिमूल्यन के कारण जुलाई 2019 में कोर मुद्रास्फीति गिरकर 33 महीनों के निचले स्तर 0.9 फीसदी पर पहुंच गई थी।"

एडिसवीस सिक्युरिटीज की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा का कहना है, "वर्तमान विकास दर-मुद्रास्फीति का संयोजन काउंटर-साइक्लिकल मौद्रिक रुख के लिए सही है और निकट भविष्य में मुद्रास्फीति चार फीसदी से कम रहने का अनुमान है। उम्मीद है कि एमपीसी विकास दर को बढ़ाने पर ध्यान देगी और रेपो रेट में हम और कमी की उम्मीद करते हैं।"

--आईएएनएस

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.