जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख को स्थानीय लोगों की इच्छाओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा: PM नरेंद्र मोदी
Wednesday, 14 August 2019 11:22

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले 75 दिन की अवधि के दौरान जो सबसे बड़ा निर्णय लिया, वह है कश्मीर पर लिया गया फैसला. उनके मुताबिक, उन्होंने यह निर्णय इसलिए लिया, ताकि वहां बेहतर एकजुटता और आवागमन सुनिश्चित हो और दोहरी नागरिकता का झूठा सिद्धांत हमेशा के लिए समाप्त हो जाए.

अपने दूसरे कार्यकाल के प्रारंभ में ही कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए कटिबद्ध दिख रहे प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का यह कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. समाचार एजेंसी IANS ने अनुच्छेद 370 पर उनके निर्णय, जिसका बहुत-से लोगों ने स्वागत किया है, और कुछ ने विरोध किया है, के बारे में उनसे कई सवाल पूछे. 

जब प्रधानमंत्री से पूछा गया, इस समय एक असहज-सी शांति देखने को मिल रही है, सो, आपको क्यों लगता है कि जम्मू एवं कश्मीर के लोग आपके साथ खड़े होंगे, तो प्रधानमंत्री ने अपने अंदाज़ में स्पष्टता के साथ जवाब दिया, "कश्मीर पर लिए गए निर्णय का जिन लोगों ने विरोध किया, उनकी जरा सूची देखिए - असामान्य निहित स्वार्थी समूह, राजनीतिक परिवार, जो आतंक से सहानुभूति रखते हैं और कुछ विपक्ष के मित्र - लेकिन भारत के लोगों ने अपनी राजनीतिक संबद्धताओं से इतर जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के बारे में उठाए गए कदमों का समर्थन किया है... यह राष्ट्र के बारे में है, राजनीति के बारे में नहीं... भारत के लोग देख रहे हैं कि जो निर्णय कठिन, मगर ज़रूरी थे, और पहले असंभव लगते थे, वे आज हकीकत बन रहे हैं..."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विचार है कि घाटी में जीवन सामान्य हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान ने वास्तव में भारत का नुकसान किया है, और इससे मुट्ठीभर परिवारों और कुछ अलगाववादियों को लाभ हुआ है. PM ने कहा, "इस बात से अब हर कोई स्पष्ट रूप से वाकिफ है कि अनुच्छेद 370 और 35ए ने किस तरह जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख को पूरी तरह अलग-थलग कर रखा था... सात दशकों की इस स्थिति से लोगों की आकांक्षाएं पूरी नहीं हो पाईं... नागरिकों को विकास से दूर रखा गया... हमारा दृष्टिकोण अलग है - गरीबी के दुष्चक्र से निकालकर लोगों को अधिक आर्थिक अवसरों से जोड़ने की आवश्यकता है... वर्षों तक ऐसा नहीं हुआ... अब हम विकास को एक मौका दें..."

प्रधानमंत्री ने अपने कश्मीरी भाइयों से एक उत्कट विनती की, "जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के मेरे भाई-बहन हमेशा एक बेहतर अवसर चाहते थे, लेकिन अनुच्छेद 370 ने ऐसा नहीं होने दिया... महिलाओं और बच्चों, SC और ST समुदायों के साथ अन्याय हुआ... सबसे बड़ी बात कि जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख के लोगों के इनोवेटिव विचारों का उपयोग नहीं हो पाया... आज BPO से लेकर स्टार्टअप तक, खाद्य प्रसंस्करण से लेकर पर्यटन तक, कई उद्योगों में निवेश आ सकता है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा हो सकता है... शिक्षा और कौशल विकास भी फलेगा-फूलेगा..."

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