तीन राज्य बच्चा चोरी की अफवाहों की चपेट में
Tuesday, 13 August 2019 12:40

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पटना/लखनऊ/भेपाल: देश के तीन प्रमुख हिंदीभाषी राज्यों में बच्चा चोरी की अफवाहों पर उन्मादी भीड़ की पिटाई से बेकसूरों की जान जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पुलिस अपनी मुस्तैदी का दावा करती है और यह भी कहती है कि लोग जागरूक हो जाएं, अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून को हाथ में लेने वालों में कानून का खौफ रहे, तभी मॉब लिंचिंग (भीड़ हिंसा) की घटनाएं रुक सकती हैं। बिहार की राजधानी पटना में हाल के दिनों में बच्चा चोरी की अफवाह उड़ने की 20 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। ये घटनाएं गांधी मैदान, दीघा, राजीव नगर, फुलवारीशरीफ, मोकामा, दुल्हिनबाजार, बाढ़ व नौबतपुर थाना क्षेत्र में हुई हैं। इन घटनाओं में कम से कम दो बेकसूरों की जान जा चुकी है और पिटाई से घायल कई लोग आज भी मौत से जूझ रहे हैं।

पटना के नौबतपुर थाना क्षेत्र में शनिवार को बच्चा चोर होने के संदेह में ग्रामीणों ने एक राहगीर की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस ने 23 लोगों को गिरफ्तार किया है। थाना प्रभारी सम्राट दीपक ने बताया कि इस मामले में 43 नामजद तथा 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ नौबतपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय भी कहते हैं कि राज्य में बच्चा चोरी की एक भी घटना नहीं हुई है, महज अफवाह फैलाई जाती है। उन्होंने कहा, "बिहार में बच्चा की चोरी की एक भी घटना का साक्ष्य या मामला सामने नहीं आया है। केवल कुछ असामाजिक और शरारती तत्व अफवाह फैलाने में लगे हैं। इन पर प्रशासन की कड़ी नजर है। लोग ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें।"

पांडेय ने कहा कि कुछ लोग ऐसी अफवाहें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। उन्होंने राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों, मुखियाओं, सरपंचों, पार्षदों और चौकीदारों से अपील की है कि वे आगे बढ़कर इन अफवाहों को 'काउंटर' करने की कोशिश करें।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मनेर और नौबतपुर में बच्चा चोरी की अफवाह को लेकर हुई घटनाओं के बाद सोशल साइट्स के जरिए भी पुलिस जागरूकता अभियान चला रही है।

बच्चा चोरी की अफवाहों से अभिभावक भी चिंतित हैं। कई अभिभावक अब अपने बच्चों को खुद स्कूल पहुंचाने और छुट्टी के बाद लेने जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, गोंडा और इटावा समेत अन्य स्थानों पर भीड़ द्वारा बच्चा चोरी के शक में कई लोगों को पीटा गया। पुलिस विभाग के अधिकारी मानते हैं कि ऐसी घटनाओं में सबसे ज्यादा सोशल मीडिया का योगदान है। ऐसे कृत्यों को अंजाम देने वालों के खिलाफ आने वाले समय में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कानून के जानकार और वरिष्ठ अधिवक्ता पदम कीर्ति ने आईएएनएस को बताया, "पुलिस पेट्रोलिंग ग्राउंड लेवल पर नहीं हो रही है। इसी कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। जितनी भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं या तो वह ग्रामीण क्षेत्र में हो रही हैं, या फिर उन क्षेत्रों में हो रही है, जहां अशिक्षित लोग ज्यादा हैं।"

उन्होंने कहा कि शिक्षा और आर्थिक पिछड़ेपन के कारण भी ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। धार्मिक उन्माद के कारण भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। मारने वाले सोच रहे हैं कि सरकार उन्हें बचाएगी। मध्य प्रदेश में इसे रोकने के लिए कानून बनाया जा रहा है, जिसमें दस साल सजा का प्रावधान है। लेकिन इससे कुछ होने वाला नहीं है। इसमें तो मार्डर का एक्ट 302/24 का कानून बनाया जाना चाहिए। कानून का भय लोगों से खत्म हो रहा है। इसीलिए घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे निपटने के लिए बहुत सख्त कानून बनाएं जाने की जरूरत है।

वहीं, अपर प्रमुख सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने कहा, "बच्चा चोरी के शक में हो रही हत्या को लेकर कोई जेनरल इनपुट नहीं है। फिर भी ऐसी घटनाओं को रोकने के पहले से ही नियम बने हुए हैं और इनसे निपटने के लिए आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।"

उधर, मध्य प्रदेश में बच्चा चोर गिरोह की अफवाहों के कारण बढ़ रही मॉब लिंचिग की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे अफवाहों से भरे मैसेज पर नजर रख रही है। पुलिस की ओर से खासतौर पर व्हाट्सएप और फेसबुक पर नजर रखी जा रही है।

बीते 20 दिनों में भोपाल, उज्जैन, देवास, इंदौर, सागर, छतरपुर, भिंड, मुरैना सहित अन्य स्थानों पर भीड़ द्वारा बच्चा चोरी के शक में कई लोगों को पीटा गया।

सूत्रों का कहना है कि अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया खासकर व्हाट्सएप और फेसबुक पर फेक मैसेज का सहारा ले रहे हैं। पुलिस के सामने ऐसे फेक मैसेज भी आए हैं, जिनमें गिरफ्त से छुड़ाए गए बाल मजदूरों को चोरी किए गए बच्चे बताया गया है। इतना ही नहीं कई वीभत्स तस्वीरों को भी बच्चा चोरों से जोड़कर वायरल किया गया है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने अधिकारियों से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे अफवाहों पर खास नजर रखने को कहा है।

पुलिस के मुताबिक, राज्य में बच्चा चोरी के शक में जिन लोगों को भीड़ द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, उनमें अधिकांश मानसिक रोगी या गरीब तबके से जुड़े लोग हैं। ऐसे लोगों की हालत को देखकर कुछ लोग उन्हें आसानी से बच्चा चोर बताते हुए भीड़ को उकसाते हैं। पुलिस भीड़ को उकसाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी जारी कर चुकी है।

--आईएएनएस

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