हिमाचल का प्रस्ताव केंद्र में 8 साल से लंबित
Tuesday, 02 April 2013 17:14

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य के कुछ इलाकों को 'अनुसूचित' और यहां रहने वालों को अनुसूचित जनजाति घोषित करने के लिए केंद्र सरकार के पास करीब आठ साल पहले प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन इसे अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि हिमाचल प्रदेश के जनजाति मामलों के मंत्रालय की ओर से चार मई, 2005 को सिरमौर जिले के ट्रांस-गिरि इलाके सहित कुछ अन्य इलाकों को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था।

राज्य सरकार के प्रस्ताव में जो इलाके सूचीबद्ध किए गए थे, उनमें कांगड़ा जिले का छोटा एवं बड़ा बंगल गांव, मांडी जिले की चोहर घाटी, चंबा जिले का चुराह, कुल्लू जिले का मलाना तथा शिमला जिले का डोडरा क्वार तथा रामपुर बुशहर क्षेत्र भी शामिल हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों में बरद, बंगला, लबाना, हैती तथा डुड्रा क्वारू समुदायों के लोग अनुसूचित जनजाति के तौर पर रहते हैं।

पूर्व विधायक जगत सिंह नेगी ने आईएएनएस से कहा कि हैती समुदाय के लोग सिरमौर जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों- शिलाई, रेणुका तथा पछाड़ में रहते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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