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न्यायालय ने इतालवी राजदूत पर पाबंदी हटाई
Tuesday, 02 April 2013 17:03

सर्वोच्च न्यायालय ने इटली के राजदूत डेनियल मेंसिनी के देश छोड़कर जाने पर पाबंदी लगाने वाला अपना 14 मार्च का आदेश मंगलवार को वापस ले लिया है। न्यायालय का यह आदेश इटली द्वारा भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी नौसैनिकों को मुकदमे की सुनवाई के लिए भारत भेजने के बाद आया है। इससे पहले इटली ने नौसैनिकों को भारत भेजने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद न्यायालय ने इटली के राजदूत के देश छोड़ने पर पाबंदी लगा दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने ही आरोपी नौसैनिकों को इटली के आम चुनाव में मतदान के लिए स्वदेश जाने की अनुमति दी थी। मेंसिनी ने तब न्यायालय से वादा किया था कि नौसैनिक लौट आएंगे, लेकिन बाद में इटली की सरकार इससे मुकर गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने महान्यायवादी जी. ई. वाहनवती से यह भी पूछा कि इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालत गठित करने के उसके 18 जनवरी के आदेश के संबंध में केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है, ताकि सरकार यह बता सके कि त्वरित अदालत गठित करने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं।

वहीं, इटली सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने विभिन्न मीडिया रपटों का जिक्र करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत और मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया है, जबकि न तो एनआईए और न ही सीजेएम की अदालत को इस मामले को निपटाने का अधिकार है।

वाहनवती ने हालांकि न्यायालय से अपील की कि वह मीडिया रपट के आधार पर संज्ञान न ले।

सर्वोच्च न्यायालय ने 18 जनवरी के अपने आदेश में कहा था कि केवल भारत सरकार को ही इन दो इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई करने का अधिकार है। इसलिए केंद्र सरकार प्रधान न्यायाधीश की सहमति से इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।