चर्च निकाय ने गोवा पर्यटन नीति 2020 की निंदा की, इसे 'मृगतृष्णा' कहा
Saturday, 28 November 2020 17:04

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पणजी: चर्च निकाय ने नवनिर्मित गोवा पर्यटन नीति 2020 को 'मृगतृष्णा' की तरह बताते हुए कहा कि इससे न तो राज्य को लाभ होगा, न ही यहां के लोगों को। साथ ही यह भी कहा कि दस्तावेज में डेटा और तथ्यों की भी कमी है।

राज्य के पर्यटन मंत्रालय को लिखे पत्र में सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म के कार्यकारी निदेशक फादर फ्रेडी ब्रागांका, जो गोवा चर्च के तत्वावधान में काम करते हैं, उन्होंने कहा कि पिछले महीने कैबिनेट ने जिस नीति को मंजूरी दी थी, उसमें पर्यावरण पतन, सेक्स टूरिज्म, ड्रग्स की आसान उपलब्धता, महिलाओं और बच्चों की ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज किया गया था।

वहीं वर्ष अंत के आसपास अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों के बारे में कहा गया कि यह कथन विचारों में दिवालियापन प्रदर्शित करता है। आश्चर्य करने वाली बात यह है कि अधिक खर्चीला की अवधारणा और उसका परिमाणीकरण क्या है। वल्र्ड क्लास जैसे अस्पष्ट शब्दों को योग्य बनाने की जरूरत है।

फादर ब्रागांका ने मंत्रालय को लिखे अपने पत्र में कहा कि "लोगों को फॉकस करते हुए न्यायसंगत और समान पर्यटन की परिकल्पना करने की जरूरत है।" इसके साथ ही उन्होंने नीति को होल्ड पर रखने और उद्योगों के स्टेकहॉल्डर्स से चर्चा फिर से शुरू करने की भी मांग की।

पत्र में आगे कहा गया, "लोगों के लिए व्यापक विकास कार्यक्रम की अनुपलब्धता के साथ ही इसमें पर्यावरणीय पतन, तटीय क्षेत्र के नियमों का उल्लंघन, सांस्कृतिक क्षय, सेक्स पर्यटन, नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता, बाल श्रम, बाल और महिला तस्करी, अपनी जमीन से समुदायों का अलगाव जैसे गंभीर मुद्दों को संबोधित नहीं किया गया।"

फादर ब्रागांका का यह भी सुझाव है कि पर्यटन नीति दोषपूर्ण आंकड़ों पर आधारित है और इसलिए यह कोविड-19 महामारी के मद्देनजर पर्यटन फुटफॉल सहित कई मुद्दों से संबंधित अपने आकलन में लक्ष्य से दूर है।

--आईएएनएस

एमएनएस/एसजीके

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