केबीसी में 50 लाख रुपये जीतने वाली तहसीलदार ने कहा, अकादमी में चाटुकारिता, भ्रष्टाचार की ट्रेनिग
Tuesday, 13 August 2019 12:33

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भोपाल: चर्चित टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में 50 लाख रुपये जीत कर सुर्खियों में आईं मध्य प्रदेश की राज्य सेवा की अधिकारी अमिता सिंह तोमर एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने अफसरों को प्रशिक्षण देने वाली प्रशासनिक अकादमी पर ही सवाल उठा दिए हैं। तोमर ने अपनी फेसबुक वाल पर लिखा है, "व्यवस्था से घिन आती है। लगता है कि अकादमी में चाटुकारिता और भ्रष्टाचार की ट्रेनिग दी जा रही है।" अमिता सिंह ने शुक्रवार नौ अगस्त की रात अपनी फेसबुक वाल पर 'चाटुकारिता और भ्रष्टाचार बनाम शासकीय सेवा' शीर्षक वाले एक पोस्ट में अपनी पीड़ा जाहिर की है। उनके 16 साल के कार्यकाल में 10 जिलों में कुल 28 तबादले हुए हैं। वह वर्तमान में श्योपुर जिले में तहसीलदार के पद पर हैं, मगर उनकी पदस्थापना निर्वाचन शाखा में है। अमिता ने वर्ष 2011 में केबीसी में 50 लाख रुपये जीते थे।

अमिता के इस पोस्ट पर अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अलबत्ता प्रशासन ने इन आरोपों को उनका निजी विचार बताया है।

श्योपुर के कलेक्टर बसंत पुर्रे ने सोमवार को आईएएनएस से कहा, "यह पोस्ट (अमिता सिंह तोमर) संज्ञान में आया है, लेकिन इसमें कही गई बातें उनके (अमिता) निजी विचार हैं। हम इसमें देखेंगे कि क्या कुछ किया जा सकता है।"

उन्होंने पोस्ट में अभिव्यक्ति की आजादी का जिक्र करते हुए तंज कसा, "अभिव्यक्ति की आजादी सिर्फ ब्लैकमेलर पत्रकारों को, फिल्मी भांड को ही मिली हुई है। बाकी देश वासी किसी न किसी रूप से अपनी भावनाएं अभिव्यक्त करते ही किसी न किसी कानूनी शिकंजे में फंस जाते हैं और फिर भागते हैं उनके मित्र और परिजन कोर्ट की ओर उनको जमानत दिलाने! हाल ही में एक मीम ट्वीटर पर डालने के कारण एक लड़की को हवालात की हवा खानी पड़ी थी।"

उन्होंने आगे लिखा है, "खैर! मैं सिर्फ शासकीय कर्मचारियों की बात कर रही हूं। सच यह भी है कि सीसीए रूल का इस्तेमाल भी सीधे-साधे नियमानुसार काम करने वाले कर्मचारियों को ही प्रताड़ित करने के लिए किया जाता है। चाटुकार और भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए उसके मायने बदल दिए जाते हैं!"

उन्होने आगे लिखा, "हमारे काडर की बात करें, मेरे एक साथी तहसीलदार पर लोकायुक्त के 59 केस दर्ज हैं, पर वह सदा मुख्यालय तहसीलदार के पद पर ही सुशोभित रहते हैं। सारे नियम दरकिनार, क्योंकि सबसे बड़ा गुण वरिष्ठ अािकारियों की चाटुकारिता और भ्रष्टाचार में निपुणता उनके सारे दुर्गुणों पर भारी पड़ती है! हम लोगों ने अकादमी में जो ट्रेनिग की थी, वह विभागीय परीक्षा के लिए और काम करने की क्षमता बढ़ाने के लिए की थी। लेकिन पिछले दो-तीन नायब तहसीलदारों के बैच को अपने साथ काम करते देख कर लगता है कि अकादमी में अब कार्य के प्रति निष्ठा और अनुशासन की ट्रेनिग नहीं, चाटुकारिता और भ्रष्टाचार की ट्रेनिग दी जा रही है।"

अमिता सिंह ने अपने पोस्ट में नायब तहसीलदारों को तहसील का प्रभार देने सहित नवनियुक्त अधिकारियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गाड़ी में धूमने का भी जिक्र किया है। उन्होंने यह भी लिखा है कि "सारे प्रदेश के जिलों में देख लीजिए, तहसीलदार के रहते भी नायब तहसीलदार को कहीं मुख्यालय का प्रभार दिया गया है, कहीं बड़ी तहसीलों का प्रभार और हालात यह है कि तहसीलदारों को दरकिनार कर वरिष्ठतम साहिबान सीधे इन छोटे प्रभावशाली साहिबान से बात करते हैं। सारे नियम कायदे ताक पर रख कर इनको ही प्राथमिकता दी जा रही है पता है क्यों? क्योंकि ये साहिबान ट्रेनिग में वरिष्ठों को पटाने की कला और चाटुकारिता सीखकर आए हैं।"

उन्होंने सीसीए रूल का हवाला देते हुए लिखा, "यह रूल जुबान पर ताला जो डाल कर रखता है! घिन आती है इस व्यवस्था पर, बहुत क्लेश होता है, पर क्या करें, कोई और रास्ता भी तो नहीं है न। 'नौकरी क्यों करी, गरज पड़ी तो करी' वाली कहावत चरितार्थ होती है, चुप हूं!"

अमिता ने इन बातों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की वजह भी बताई है। उन्होंने लिखा है, "कुछ लिखकर थोड़ी-सी मानसिक क्लेश और व्यथा से राहत मिली है। शेष फिर लिखूंगी, क्योंकि सीसीए रूल के अंतर्गत इस पोस्ट का स्पष्टीकरण भी देना होगा न! उसके लिए भी मानसिक रूप से ख़ुद को तैयार कर रही हूं। क्योंकि सच कड़वा होता है, जिसका स्वाद सबको पसंद नहीं आता!"

उन्होंने पोस्ट के साथ एक स्टीकर भी लगाया है, जिसमें लिखा है, "खुद को अगर जिंदा समझते हो तो गलत का विरोध करना सीखो, क्योंकि लहर के साथ लाशें बहा करती हैं तैराक नहीं।"

--आईएएनएस

 

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