आजकल की हॉलीवुड फिल्मों में विलेन दे रहे सामाजिक संदेश
Sunday, 11 August 2019 18:04

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नई दिल्ली: हॉलीवुड की दुनिया अब केवल ब्लैक एंड व्हाइट तक सीमित नहीं रही, बल्कि बदलते राजनीतिक वातावरण, नस्लीय उपक्रमों और पर्यावरण संबंधी समस्याओं के साथ हॉलीवुड में खलनायकों के रूप में भी परिवर्तन आया है।

अब वह दिन नहीं रहा जब हॉलीवुड के विलेन अपने मजे के लिए नफरत फैलाते थे या जिनका उद्देश्य महज दुनिया की तबाही थी, बल्कि आजकल की हॉलीवुड फिल्मों में खलनायक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उठाते नजर आ रहे हैं।

अब आप 'एवेंजर्स' सीरीज में सुपर विलेन थानोस को ही ले लीजिए जो बढ़ती हुई आबादी की समस्या को दूर करने के लिए लोगों को खत्म करना चाहता था। ठीक वैसे ही 'गॉडजिला : किंग ऑफ द मॉनस्टर्स' में गॉडजिला का किरदार इंसान द्वारा किए गए उनके काम का ही नतीजा था, 'एक्वामैन' में किंग ओर्म समंदर को प्रदूषित करने के लिए मानवता के खिलाफ अपना कदम उठाया।

फिल्म के रिलीज होने के वक्त 'एक्वामैन' के निर्देशक जेम्स वान ने आईएएनएस को बताया था, "पर्यावरण वास्तविक जिंदगी का एक बड़ा मुद्दा है। यह बद से बदतर होता जा रहा है, क्योंकि हम देख सकते हैं कि पर्यावरण में बदलाव हम सभी को प्रभावित कर रहा है इसलिए स्वाभाविक रूप से यह कहानी का हिस्सा बन गया है, लेकिन इसकी सबसे अच्छी बात यह रही कि मुझे इसे एक विलेन की दृष्टिकोण से करने का मौका मिला। आप कुछ हद तक समझ सकते हैं कि किंग ओर्म हमसे नाराज क्यों है?"

समीक्षकों द्वारा प्रशंसित ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ब्लैक पैंथर' में विलेन इरिक किलमोंगर के रूप में माइकल बी. जॉर्डन को भी लोगों ने उतना ही पसंद किया, जितना कि सुपरहीरो टीचला को किया, क्योंकि अंत में वह अपनी पिता की मौत की वजह से रंग से उत्पीड़ित लोगों की मदद करने को प्रेरित होता है।

हॉलीवुड में खलनायकों का जन्म अब सिर्फ विनाश करने के चलते नहीं हो रहा है, बल्कि उनका जन्म उनकी जिंदगी में हो रही सामाजिक अन्याय के चलते हो रहा है। वे लोगों से दुनिया को बेहतर जगह बनाने का आग्रह करते दिख रहे हैं। उनका तरीका दूसरा हो सकता है, लेकिन वे या तो समस्या को सुलझाने की कोशिश करते हैं या अपनी पहचान के साथ संघर्ष करते हैं।

--आईएएनएस

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