प्रीति जिंटा की कंपनी ने आवासीय मकान में खोला ऑफिस, चलेगा 38 लाख रुपये का सिविल केस

बाॅलीवुड की पूर्व अदाकारा और किंग्स 11 पंजाब की मालकिन प्रीति जिंटा की कंपनी केपीएच ड्रीम क्रिकेट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 38 लाख रूपये का सिविल केस चलेगा। कंपनी ने चंडीगढ़ के पॉश इलाके में आवासीय उद्देशय के लिए मकान लिया था और फिर वहां व्यवसायिक गतिविधियां होने लगी। इस बात को लेकर मकान मालिक और डेंटल चिकित्सक डॉ. सुभाष सतीजा ने शिकायत दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि रहने के लिहाज से मकान दिया गया था, लेकिन उसमें ऑफिस खोल दिया गया। इस वजह से इस्टेट ऑफिस ने डॉ. सतीजा को मिसयूज चार्जेंस का 38 लाख रूपये का नोटिस भेजा। सतेजा ने इस पैसे को कंपनी से वसूलने के लिए मुकदमा दायर किया था। सतेजा के इस मुकदमे को खारिज करने के लिए कंपनी की ओर से आवेदन दिया गया था। इस आवेदन को सिविल जज हरजोत सिंह गिल ने खारिज कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

शिकायत के अनुसार, डॉ. सतीजा ने 1 फरवरी 2011 को चंडीगढ़ सेक्टर 19 स्थित अपना मकान प्रीति जिंटा की कंपनी को तीन साल के लिए किराए पर दिया था। एग्रीमेंट में यह साफ था कि इस मकान का उपयोग आवासीय तौर पर किया जायेगा। लेकिन कंपनी ने इसका व्यवसायिक इस्तेमाल शुरू कर दिया। इस बात को लेकर कई बार अधिकारियों को कहा भी गया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इस्टेट ऑफिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो उसने भी कंपनी को ऑफिस बंद करने को कहा। आखिरकार इस्टेट आॅफिस ने कंपनी और मकान मालिक दानों को नोटिस भेज हाजिर होने का आदेश दिया। इस्टेट आॅफिस के नोटिस के बावजूद कंपनी का कोई भी प्रतिनिधि इस्टेट ऑफिसर के समक्ष पेश नहीं हुआ। जबकि मकान मालिक डॉ. सतीजा ने इस्टेट ऑफिसर के समक्ष प्रस्तुत होकर बताया कि मकान का मिसयूज कंपनी द्वारा किया जा रहा है। इसके पश्चात 29 नवंबर 2011 को  इस्टेट ऑफिस ने मकान के मिसयूज को लेकर 38 लाख 11 हजार रूपये का नोटिस भेजा। नोटिस का पता चलते ही कंपनी ने मकान खाली कर दिया।

इस बाबत डॉ. सतीजा का कहना है कि उन्होंने कई बार कंपनी के अधिकारियों से 38 लाख रूपये पेमेंट करने को कहा, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। वहीं, दूसरी ओर इस्टेट ऑफिस ने जुर्माने की रकम अदा नहीं करने पर मकान सीज करने की बात कही। इस पर उन्होंने इस्टेट ऑफिसर के खिलाफ मुकदमा लड़ा, जहां उनकी जीत हुई। इस्टेट आॅफिस ने भी कंपनी को मिसयूज चार्जेज देने को कहा है। अाखिरकार उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम का कहना है कि कंपनी ने उस मकान में ऑफिस नहीं खोला था। आईपीएल मैच के दौरान यहां कंपनी के कर्मचारियों को ठहराया जाता था। कंपनी ने यह भी आराेप लगाया कि डॉ. सतेजा अपने मकान को बेचना चाहते थे। लेकिन जब इस्टेट ऑफिस ने 38 लाख का बकाया बताया तो इसके लिए उन्होंने कंपनी को जिम्मेवार ठहरा दिया। कंपनी ने इसी आधार पर मुकदमा खारिज करने का आवेदन दिया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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