5जी कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर देते हुए केंद्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि सरकार के लिए यह जरूरी है कि हम देश में जल्द से जल्द 5जी नेटवर्क की तैनाती करे। यहां आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2018 के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार ने भारत में 5जी की तैनाती का टाइमलाइन 2020 निर्धारित किया है। 

सिन्हा ने कहा, "5जी निश्चित रूप से डिजिटल कम्युनिकेशन का भविष्य हैं और इसे जल्द से जल्दे तैनात करना सरकार के लिए जरूरी है।"

उन्होंने कहा, "भारत के लिए 5जी के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है..इससे हमें अवसरंचना की चुनौतियों से पार पाने और डिजिटल खाई को भरने में मदद मिलेगी।"

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का प्रयोग लैगिंक खाई और शहरी और ग्रामीण भारत के बीच की खाई को भरने के लिए होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस बदलाव में कोई भी देशवासी पीछे नहीं छूटे।

उन्होंने इसके अलावा स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए 250 मोबाइल एप्स को भी लांच किया। 

--आईएएनएस

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राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मंजूरी के बाद वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय की प्रक्रिया पूरी हो गई है और विलय के बाद नवगठित कंपनी 'वोडाफोन आइडिया लिमिटेड' का संचालन भी शुरू हो गया है। दोनों कंपनियों की ओर से शुक्रवार को जारी एक संयुक्त बयान में इस बाबत जानकारी दी गई। 

दूरसंचार विभाग की ओर से पिछले महीने विलय की अनुमति मिलने के बाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) की मंजूरी ही अंतिम आधिकारिक अनुमति थी।

बयान के अनुसार, आदित्य बिरला समूह और वोडाफोन समूह की साझेदारी में आइडिया सेल्यूलर (नया नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड) भारत के अग्रणी दूरसंचार सेवा प्रदाता के रूप में काम करने लगा है, जिसके पास 40.8 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं।

वोडाफोन आइडिया के नवगठित निदेशक मंडल में छह स्वतंत्र निदेशक समेत कुल 12 निदेशक हैं और कुमार मंगलम बिरला इसके अध्यक्ष हैं। निदेशक मंडल ने बालेश शर्मा को सीईओ नियुक्त किया है। 

बयान के अनुसार, नई कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 32.2 फीसदी होगी। 

सम्मिलित आधार पर वोडाफोन समूह की 45.2 फीसदी हिस्सेदारी है और आदित्य बिरला समूह की 26 फीसदी। 

--आईएएनएस

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लंबे समय तक चली बहस के बाद भारत सरकार ने आखिरकार नेट न्यूट्रैलिटी को मंजूरी दे दी है. ट्राई ने कुछ समय पहले नेट न्यूट्रैलिटी की सिफ़ारिश की थी. बुधवार को इस सिफ़ारिश को दूरसंचार आयोग ने मंज़ूरी दे दी है. इस आयोग में अलग-अलग मंत्रालयों के नुमाइंदे शामिल हैं. नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत के बाद कोई कंपनी इंटरनेट में कोई भेदभाव नहीं कर पाएगी. प्राथमिकता के आधार पर किसी रुकावट को भी ग़ैरकानूनी माना जाएगा. इसके लिए जुर्माना भी लग सकता है और सख़्त कार्रवाई होगी. ये फ़ैसला मोबाइल ऑपरेटरों, इंटरनेट प्रोवाइडर्स, सोशल मीडिया कंपनियों सब पर लागू होगा. इस फैसले के बाद इंटरनेट सेक्टर में मोनोपोली भी संभव नहीं रह जाएगी.

हालांकि रिमोट सर्जरी और स्वचालित कर जैसी कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के दायरे से बाहर रखा जाएगा. दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने कहा, ‘‘दूरसंचार आयोग ने ट्राई की सिफारिशों के आधार पर नेट न्यूट्रैलिटी को मंजूरी दे दी. ऐसी संभावना है कि इसमें कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है.’’

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सेवा प्रदाताओं के बीच ऐसे किसी प्रकार के समझौतों पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की है जिससे इंटरनेट पर सामग्री को लेकर भेदभाव हो. उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिये आयोग ने नई दूरसंचार नीति 'राष्ट्रीय डिजिटल कम्युनिकेशंस पॉलिसी 2018' को भी मंजूरी दे दी है. अरुणा ने कह, ‘‘बैठक में मौजूद सभी लोगों ने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचा आज भौतिक बुनियादी ढांचे के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है. नीति आयोग के सीईओ (अमिताभ कांत) ने कहा कि जिलों के लिये हमें निश्चित रूप से डिजिटल बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना चाहिए. इसीलिए देश में कारोबार सुगमता और उपयुक्त नीति माहौल जरूरी है.’’

बैठक में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि दूरसंचार आयोग ने दिसंबर 2018 तक सभी ग्राम पंचायतों में 12.5 लाख वाईफाई हॉट स्पॉट लगाने को मंजूरी भी दी है. इसके लिये परियोजना को व्यवहारिक बनाने को लेकर करीब 6,000 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया जाएगा.

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 कॉल ड्रॉप और खराब कनेक्शन से शायद ही कोई मोबाइल यूजर ना पीड़ित हो. जब भी हम फोन पर बात करते हैं तो हमारी कॉल बीच में ही खुद-ब-खुद कट जाती है. कई बार ये भी होता है कि खराब नेटवर्क के कारण हमारी कॉल जुड़ ही नहीं पाती है. अगर आप इन समस्यों से परेशान हैं तो आपके लिए खुशी की खबर है. जल्द ही आप घर, ऑफिस या किसी भी ऐसी जगह इंटरनेट वाले एरिया से बिना टेलीकॉम नेटवर्क के कॉल कर सकेंगे. इस तकनीक को इंटरनेट टेलीफोनी कहते हैं. इसके लिए यूजर को ब्रॉडबैंड नेटवर्क के साथ वाई-फाई से जुड़े रहना होगा.

TRAI ने की थी सिफारिश
इंटरनेट टेलीफोनी की सिफारिश टेलीकॉम रेग्यूलेटरी ने की थी. इसे उन यूजर्स के लिया जाया जाएगा को बुरे नेटवर्क से परेशान हैं और कॉल ड्रॉप की समस्या से जूझ रहे हैं. इस टेलीफोनी सर्विस के इस्तेमाल के लिए आपको अपने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर की ओर से जारी की गई एक एप डाउनलोड करनी होगी. ये सर्विस ऐसे यूजर्स के लिए बेहतर विकल्प साबित होगी जहां नेटवर्क खराब लेकिन वाई-फाई सिग्नल मजबूत होगा.

नहीं होगी नए नंबर की जरुरत
इंटरनेट टेलीफोनी का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल फोन यूजर को एक एप डाउनलोड करनी होगी. ये एप यूजर्स को उनकी टेलीकॉम कंपनियां मुहैया कराएंगी. इसे ऐसे समझिए कि अगर आपके पास जियो का नंबर है तो आपको जियो का टेलीफोनी मिलेगा. ऐसे में जो आप उसी नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं जो सिम कार्ड से लिंक हो. यानी जो नंबर आपके पास है वही टेलीफोनी सर्विस के लिए भी इस्तेमाल होगा. अगर यूजर चाहे तो किसी दूसरी टेलीकॉम कंपनी की भी टेलीफोनी एप डाउनलोड कर सकता है. ऐसी सूरत में आपको साधारण मोबाइल नंबर की तरह ही 10 डिजिट का नंबर दिया जाएगा. जिसका टेलीफोनी कॉल में आप इस्तेमाल कर सकेंगे. याद रहे कि ये एप ब्रॉडबैंड इंटरनेट वाई-फाई के जरिए कॉल की सुविधा देगी.

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अब मोबाइल सिम लेने के लिए आधार कार्ड की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. सरकार ने मोबाइल ऑपरेटरों को निर्देश जारी करके पहचान के दूसरे साक्ष्य जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, वोटर आईडी कार्ड को भी स्वीकार करने के लिए कहा है. केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश जारी किए हैं, इनके मुताबिक अब आपको मोबाइल सिम लेने के लिए आधार कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी. मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर्स को दिए इन निर्देशों में पहचान साबित करने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र भी स्वीकार करने के लिए कहा है. 
टेलिकॉम सचिव अरुण सुंदरराजन के मुताबिक, यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े. आपको बता दें कि इससे पहले उन उपभोक्ताओं को सिम नहीं दिए जाने की बात सामने आई थी, जिनके पास आधार कार्ड नहीं होता था.

यह था सुप्रीम कोर्ट का रुख हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल को आधार से लिंक कराने पर भी अहम टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि उसने कभी भी मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने का फैसला दिया ही नहीं, बल्कि सरकार ने उसके आदेश की गलत व्याख्या की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जब तक कोर्ट इस मामले पर कोई आखिरी फैसला नहीं ले लेता है तब तक सिम कार्ड के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है.

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वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में आइडिया सेलुलर को 962.1 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। कंपनी ने शनिवार को बताया कि वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में उसे कुल 1,284.6 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। 

वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में कंपनी को कुल 6,137.3 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। 

बयान में कहा गया है कि भारतीय मोबाइल उद्योग में कड़ी प्रतिस्पर्धा जारी है, साथ ही नियामकीय नियम भी प्रतिकूल हैं। नए 4जी ऑपरेटरों द्वारा ग्राहकों को भारी छूट देने से कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हुआ है। 

कंपनी ने कहा कि तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण कुल ग्राहक से मिलने वाला औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (एआरपीयू) वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में 114 रुपये था, वह घटकर चौथी तिमाही में 105 रुपये हो गया है।

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ग्राहकों को अलग-अलग टेलीकॉम कंपनी और अन्य लाइसेंस प्राप्त सर्विस सेक्टर के टैरिफ की एक ही जगह पर जानकारी देने के लिए टेलीकॉम रेगूलेटरी ट्राई ने एक पोर्टल लॉन्च किया है. सोमवार को यह जानकारी दी गई.

रेगूलेटरी ने कहा, "ट्राई की वेबसाइट (http://tariff.trai.gov.in) पर विभिन्न टैरिफ प्लान्स और अन्य टैरिफ की जानकारी डाउनलोड किए जानेवाले फार्मेट में दी जाती है, जो आसानी से उपलब्ध है. इस प्लेटफार्म से न सिर्फ ग्राहकों को फायदा होगा, बल्कि अन्य ग्राहक तुलना करके टैरिफ प्लान चुन सकेगा.''

इस पोर्टल पर ग्राहक अपना फीडबैक भी दे सकेंगे. खास बात ये है कि ये बीटा साइट है. इस वेबसाइट पर ग्राहक मोबाइल, लैंडलाइन, प्रीपेड, पोस्टपेड, सर्किलवाइज़ और ऑपरेटर्स का चुनाव करके सभी तरह के टैरिफ, प्लान वाउचर, एसटीवी, टॉप अप, प्रोमो, वीएएस की जानकारी ले सकते हैं.

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भारत में मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या जून तक 47.8 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। गुरुवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और कंटार-आईएमआरबी द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया, “2017 के दिसंबर तक मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 17.22 फीसदी बढ़कर 45.6 करोड़ यूजर्स तक पहुंच गई।” इस रिपोर्ट में देश में मोबाइल इंटरनेट की लोकप्रियता को दर्शाया गया है, जो कि किफायती होने के कारण लोकप्रिय हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया, “वॉयस पर किए जानेवाले खर्च में 2013 से ही लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) और वीडियो चैटिंग की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही हाल के समय में वॉयस सेवाओं पर किए गए जानेवाले खर्च में भारी कमी आई है।”

रिपोर्ट में कहा गया, “इसका मतलब यह है कि ज्यादातर यूजर्स के लिए वॉयस की तुलना में डेटा पर खर्च बढ़ रहा है।” रिपोर्ट में कहा गया, “शहरी भारत में साल-दर-साल अनुमानित वृद्धि दर 18.64 फीसदी रही, जबकि ग्रामीण भारत में इसी अवधि (दिसंबर 2016 से दिसंबर 2017) के दौरान अनुमानित वृद्धि दर 15.03 फीसदी रही।” रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2017 के दिसंबर तक कुल 29.1 करोड़ शहरी मोबाइल इंटरनेट यूजर्स हैं तथा 18.7 करोड़ ग्रामीण मोबाइल इंटरनेट यूजर्स हैं।

हालांकि अध्ययन में शहरी भारत में इंटरनेट पहुंच में मंदी का अनुमान लगाया गया है, जहां पहले से ही 59 फीसदी पहुंच दर्ज की गई है, जबकि ग्रामीण भारत में 18 फीसदी मोबाइल इंटरनेट पहुंच के साथ ही ग्रामीण इलाकों में आगे आने वाले दिनों में विकास की उम्मीद है।

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ज्यादातर कंपनियों ने अब डिजिटल बदलाव के महत्व को पहचान लिया है, लेकिन एशिया प्रशांत क्षेत्र और जापान की केवल 9 फीसदी कंपनियां ही अपने समूचे संगठन के डिजिटलाइजेशन की कोशिश कर रही हैं। सॉफ्टवेयर दिग्गज सीए टेक्नॉलजीज की बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। सर्वेक्षण में शामिल करीब 80 फीसदी उद्योगों और आईटी नेतृत्व का कहना था कि उद्योग का डिजिटलाइजेशन हो रहा है।

'द सीए टेक्नॉलजीज एशिया पैशिफिक एंड जापान डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन इंपैक्ट एंड रेडीनेस स्टडी' शीर्षक सर्वेक्षण में कहा गया कि हालांकि बात जब डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रासंगिक और प्रतिस्पर्धी बने रहने की आती है तो ज्यादातर कंपनियां पिछड़ती नजर आ रही हैं।

इस सर्वेक्षण में 9 एपीजे बाजारों - ऑस्ट्रेलिया, चीन, हांगकांग, भारत, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और थाइलैंड में 900 व्यापारों और आईटी नेतृत्व की डिजिटल बदलाव रणनीति का अध्ययन किया गया। सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 17 फीसदी कंपनियों ने ही पूर्ण रूप से डिजिटल रुपांतरण की रणनीति तैयार की है, और केवल 9 फीसदी ही अपने समूचे संगठन का पूर्ण डिजिटलाइजेशन करना चाहते हैं।

सर्वेक्षण में पाया गया कि कंपनियां तेजी से विकसित होती आर्थिक स्थितियों में ग्राहकों की बदलती उम्मीदों को पूरा करने तथा पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों को नई डिजिटल बदलाव से पीछे छोड़ने के लिए ही डिजिटलाइजेशन के लिए प्रेरित हो रही हैं। सीए टेक्नॉलजीज के अध्यक्ष और महाप्रबंधक (एशिया प्रशांत क्षेत्र और जापान) मार्टिन मैके ने बताया, "ऐसे युग में जहां ब्रांड्स अपने द्वारा मुहैया कराए गए डिजिटल अनुभव के आधार पर परिभाषित होते हैं, यह अनिवार्य है कि कंपनियां ग्राहकों को अपने व्यापार के केंद्र में रखे।"

मैके ने कहा, "एप्लिकेशन अर्थव्यवस्था में कामयाब होने के लिए, संगठनों को आईटी की तरफ और खासतौर से सॉफ्टवेयर की तरफ बढ़ने की जरूरत है, ताकि वे लगातार उच्च गुणवत्ता वाले एप्लिकेशन का विकास कर सकें, जो ग्राहक अनुभव को बेहतर बना सके और बड़े पैमाने पर व्यापारिक मूल्य विकसित करे।"

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डिजिटल इंडिया बनाने की लगातार कोशिश की जा रही हैं, लेकिन डिजिटल बनाने के लिए बुनियादी चीजों में सुधार किए बिना ऐसा संभव नहीं है। डिजिटलाइजेशन के लिए सबसे जरूरी है बेहतर इंटरनेट। भारत इंटरनेट के मामले में बहुत पीछे है। भारत 4G इंटरनेट की स्पीड के मामले में दुनिया भर के 88 देशों से पीछे है। इस मामले में तो पाकिस्तान भी भारत से काफी आगे है। भारत में 4G इंटरनेट की एवरेज डाउनलोड स्पीड 6Mbps की है। वहीं पाकिस्तान में 4G इंटरनेट की डाउनलोड स्पीड 14Mbps की है। ओपन सिगनल की रिपोर्ट के मुताबिक सिंगापुर में इंटरनेट की स्पीड 44Mbps की है। नॉर्थलैंड में स्पीड 42Mbps की है। नॉर्वे में स्पीड 41Mbps की है। साउथ कोरिया में स्पीड 40Mbps की है। हंगरी में स्पीड 39Mbps की है।

वहीं कुछ और देशों की बात करें तो यूएई में स्पीड 28Mbps की है। जापान में 4G इंटरनेट की स्पीड 25Mbps की है। यूके में डाउनलोड स्पीड 23Mbps की है। अमेरिका में 4G इंटरनेट की स्पीड भारत से करीब ढाई गुनी 16Mbps की है। वहीं रूस में 4G इंटरनेट की स्पीड 15Mbps की है। वहीं अल्जीरिया में भी 4G इंटरनेट की स्पीड भारत से 1.5 गुनी 9Mbps की है। ओपन सिगनल के मुताबिक यह डेटा 1 अक्टूबर 2017 से लेकर 29 दिसंबर 2017 तक का है।

इस रिपोर्ट में धीमी स्पीड के लिए नेटवर्क की क्षमता को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा भारत में बड़ा 4G नेटवर्क भी इसका कारण है। हालांकि भारत में 4G लगभग 86% लोगों के लिए उपलब्ध है। 4 जी नेटवर्क 3 जी से ज्यादा तेजी से कनेक्शन की गति देने की क्षमता का अभाव है। दूरसंचार सचिव अरुण सुंदरराजन ने कहा है कि देश के कई हिस्सों में इंटरनेट यूजर्स को इंटरनेट की स्पीड धीमी मिल रही है, इसके बारे में सरकार ध्यान दे रही है। JIO पूरे भारत में अपनी 4G सर्विस के साथ लॉन्च हुआ था। एयरटेल भी अब पूरे भारत में अपनी 4G सर्विस दे रही है। वहीं आइडिया दिल्ली और कोलकाता को छोड़कर पूरे देश में अपनी 4G सर्विस दे रही है। वहीं वोडाफोन अभी अपने 17 सर्किलों में 4G सर्विस दे रही है।

 
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