नई दिल्‍ली, एएनआइ। भाजपा के मुख्‍य कार्यालय में मंगलवार शाम को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हो रही है। पीएम मोदी, भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह और अन्‍य नेता भाजपा दफ्तर पहुंच चुके हैं। मंगलवार रात लोकसभा और विधानसभा के उम्‍मीदवारों की घोषणा हो सकती है। इसमें पार्टी की पहली सूची को मंजूरी दी जाएगी। इस सूची में अधिकांश प्रत्याशी 11 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव क्षेत्रों के हो सकते हैं। इस बीच छत्‍तीसगढ़ के भाजपा प्रभारी और महासचिव अनिल जैन ने कहा कि भाजपा के सभी वर्तमान 11 सांसदों को बदला जाएगा। केंद्रीय चुनाव समिति ने इसकी मंजूरी दी है।    

गोवा के मुख्‍यमंत्री मनोहर पर्रीकर के निधन के कारण भाजपा के उम्‍मीदवारों की घोषणा टल गई थी। इससे पहले 17 मार्च को मैराथन बैठक हो चुकी है, जिसमें कई राज्‍यों पर चर्चा हो चुकी है। 

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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में 'संगठन महामंत्री' (महासचिव, संगठन) का पद महत्वपूर्ण हो गया है। संगठन महामंत्री का पद पार्टी के वैचारिक सलाहकार आरएसएस के साथ संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित करता है। संगठन महामंत्री की सहायता राष्ट्रीय स्तर पर पांच संयुक्त महासचिवों (संगठन) द्वारा की जाती है। राज्य की भाजपा ईकाइयों में भी इसी अनुक्रम का पालन किया जाता है। भाजपा की हर राज्य इकाई में एक महासचिव (संगठन) के साथ दो-तीन संयुक्त महासचिव (संगठन) होते हैं।

भाजपा में महासचिव (संगठन) का पद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा नियुक्त 'प्रचारक' को सौंपा जाता है, जो दोनों संगठनों में सेतु की तरह कार्य करता है।

यह पद शक्तिशाली होता है और इसपर मौजूद व्यक्ति का प्रभाव दूसरे महासचिवों से ज्यादा माना जाता है।

पार्टी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव व प्रक्ता सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी जनता से जुड़े होते हैं, जबकि महासचिव (संगठन) एक बैकरूम कमांडर की तरह होता है, जो पार्टी कार्य के प्रति समर्पित होता है। यह संगठनात्मक अंतर की पहचान करता है और जमीनी हकीकत को बताता है तथा लाइमलाइट से दूर रहता है।

सूत्र बताते हैं कि महासचिव (संगठन) आरएसएस के प्रति जवाबदेह होता है और यह प्रत्यक्ष तौर पर भाजपा अध्यक्ष के प्रति जवाबदेह नहीं होता।

भाजपा में महासचिव (संगठन) के पद पर वर्तमान में रामलाल है। उनके अधीन चार संयुक्त महासचिव (संगठन) हैं। इसमें वी.सतीश, सौदान सिंह, शिव प्रकाश व बी.एल.संतोष शामिल हैं।

रामलाल : ये लंबे समय से भाजपा महासचिव (संगठन) पद पर सेवा दे रहे हैं। रामलाल को इनके संगठनात्मक कौशल के लिए जाना जाता है। वह आरएसएस के साथ समन्वय करते हैं और कैडर और विचारधारा की प्रमुखता को बनाए रखने का काम देखते हैं। इस पद पर अतीत में सुंदर सिंह भंडारी, के.एन.गोविंदाचार्य, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व संजय जोशी रह चुके हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रचारक रामलाल ने 2006 में संजय जोशी की जगह ली थी।

इस पद का महत्व एक उदाहरण से समझा जा सकता है। साल 2004 में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की एम.ए.जिन्ना पर टिप्पणी से जब विवाद हुआ तो आरएसएस ने उन पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाया। लेकिन वह दृढ़ रहे।

भाजपा में ऐसा कोई नहीं था जो कोर कमेटी की बैठक में उनके इस्तीफे का प्रस्ताव दे। इस्तीफे का प्रस्ताव संजय जोशी द्वारा दिया गया, जो उस समय इस पद पर थे, जिस पर आज रामलाल हैं। आडवाणी को पार्टी प्रमुख पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

रामलाल को जमीन से जुड़ा माना जाता है। वह नियमित तौर पर संगठनात्मक बैठक करते हैं और पार्टी के शीर्ष नेताओं को फीडबैक देते हैं और राज्य इकाइयों को पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों की सूचना देते हैं।

उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं की आवाज माना जाता है और वह उनकी शिकायतों का निपटारा करते हैं। वह वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए भी कार्य करते हैं।

वी.सतीश : यह संगठन मंत्री (संयुक्त महासचिव (संगठन)) हैं और आंध्र प्रदेश के अलावा पश्चिमी क्षेत्र (राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र) के प्रभारी हैं। यह पूर्णकालिक आरएसएस कार्यकर्ता हैं और वह लोकसभा चुनाव में चार महत्वपूर्ण राज्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सतीश का जन्म नागपुर में हुआ। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में एबीवीपी व आरएसएस के लिए कार्य किया है।

सतीश ने गुजरात में भी कार्य किया है और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और इसके अलावा आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले का करीबी माना जाता है।

शिव प्रकाश : पश्चिम बंगाल व पश्चिमी उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में मुख्य तौर पर संगठनात्मक मामलों की देखरेख कर रहे हैं।

उन्होंने अमित शाह के साथ 2014 के लोकसभा चुनाव में करीबी तौर पर कार्य किया है और उन्हें उनके कार्य के लिए पदोन्नति दी गई। उनके मार्गदर्शन में पश्चिम बंगाल में बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा के वोट शेयर में सुधार हुआ और यह दो अंकों में पहुंच गया। वह समाजिक संयोजन व संगठनात्मक गड़बड़ियों को दूर करने के लिए पर्दे के पीछे काम करने वालों में से हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बूथ स्तर व जिला स्तर के लिए टीम की नियुक्ति करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सौदान सिंह : वह छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड के प्रभारी हैं और उन्हें छत्तीसगढ़ में अतीत में भाजपा की जीत का श्रेय दिया जाता है। सिंह वर्तमान में ओडिशा में व्यस्त हैं, जहां पार्टी अपने प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए कठिन परिश्रम कर रही है।

बी.एल.संतोष : केमिकल इंजीनियरिंग से स्नातक संतोष भाजपा के दक्षिण भारत के मामलों को देख रहे हैं। उन्हें संगठनात्मक कौशल के लिए जाना जाता है। वह पार्टी की पकड़ को मजबूत करने के लिए नवीनतम संचार तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

--आईएएनएस

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अगरतला: लोकसभा चुनावों से पहले त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुबाल भौमिक व दो अन्य वरिष्ठ नेता मंगलवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। दो अन्य नेता पूर्व मंत्री प्रकाश दास व तेजतर्रार माने जाने वाले देबाशीष सेन हैं।

त्रिपुरा कांग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मन व एआईसीसी सचिव भूपेन बोरा ने एक मीडिया कांफ्रेंस में तीनों नेताओं का स्वागत किया।

भौमिक, भाजपा में उपाध्यक्ष पद पर थे। वह भाजपा में 2015 में शामिल हुए, जबकि दास व सेन 2017 में क्रमश: कांग्रेस व मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से भाजपा में शामिल हुए थे।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह ने इसी महीने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात कर लोकसभा चुनाव के समर में मदद मांगी। भाजपा अध्यक्ष ने इसी मकसद से सत्ता पक्ष की विचाराधारा के स्रोत अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) में भी शिरकत की। आरएसएस हालांकि भाजपा की चुनावरी मशीनरी का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन इस बार 2014 की तुलना में कहानी कुछ अगल है।

आरएसएस ने 2014 में जहां भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए समानांतर अभियान चलाया था, वहीं इस बार ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह खुद भी काफी समर्थ हैं।

आरएसएस पे 2014 में अत्यधिक सक्रियता दिखाई, क्योंकि ऐसा माना जाता था कि 1977 की तरह वह चुनाव निर्णायक होगा। 1977 में जनता दल गठबंधन ने पहली बार कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया था।

नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में पहले से ही यह चर्चा है कि अगर भाजपा को कम सीटें आईं तो शीर्ष पद के लिए आरएसएस केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का समर्थन कर सकता है।

इस बार बदले अफसाने के बावजूद भाजपा को देशभर में आरएसएस के विशाल नेटवर्क का लाभ मिल रहा है। यह मशीनरी फिर काम आएगी।

चुनाव अभियान में आरएसएस की गतिविधियों का आईएएनएस ने जायजा लिया कि संगठन किस प्रकार हर मतदाता से संपर्क करता है और ऐसे मसलों को उठाता है, जिनकी चुनाव में अहम भूमिका होगी।

संगठन :

बतौर सांगठनिक इकाई आरएसएस का देश को देखने का थोड़ा अलग नजरिया है। इसकी एक लचीली संरचना है, जो प्रांत या क्षेत्र और मंडल और नगर सहित पूरे देश के भौगोलिक क्षेत्र में व्याप्त है। आरएसएस ने देश का 11 क्षेत्रों में विभाजित कर रखा है।

दक्षिण : इसमें केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।

दक्षिण मध्य : इसमें दक्षिण कर्नाटक, पश्चिमी आंध्रप्रदेश, पूर्वी आंध्रप्रदेश (तेलंगाना राज्य बनने के बाद पुनर्गठित) शामिल हैं।

पश्चिम : इसमें कोंकण, पश्चिमी महाराष्ट्र, देवगिरि, गुजरात और विदर्भ शामिल हैं।

मध्य : इसके अंतर्गत मालवा, मध्य भारत, महाकौशल और छत्तीसगढ़ आते हैं।

उत्तर पश्चिम : इसमें चितौड़, जयपुर और जोधपुर शामिल हैं।

उत्तर : यह आरएसएस की गतिविधियों का केंद्र है, क्योंकि इसमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश : उत्तराखंड, मेरठ और ब्रज इसमें शामिल हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश : इसमें कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर शामिल हैं।

उत्तर पूर्व : इसमें उत्तरी बिहार, दक्षिणी बिहार और झारखंड आते हैं।

पूर्व : इसमें उत्कल, दक्षिणी बंगाल और उत्तर बंगाल शामिल हैं।

असम : इसमें उत्तर असम, अरुणाचल प्रदेश, दक्षिण असम और मणिपुर शामिल हैं।

आरएसएस के अग्रिम संगठन इस विशाल भौगोलिक संरचना में काम करते हैं।

आरएसएस के निर्णय लेने वाले दो निकाय हैं- अखिल भारतीय कार्यकारिणी और अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा।

(सूत्र : आरएसएस के बारे में जानें)

मसले :

सबरीमाला मामला : सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में सभी संबद्ध इकाइयों और रिवाजों व पीठ की एकमात्र महिला सदस्य की अलग राय पर विचार नहीं किया गया। राज्य सरकार पर फैसले को किसी निर्धारित समय-सीमा में लागू करने की बाध्यता नहीं थी, लेकिन फैसले की बारीकी को समझे बगैर प्रदेश सरकार ने हिंदू समाज के प्रति राजनीतिक वैमनस्य और अनावश्यक जल्दबाजी दिखाते हुए गैर-हिंदू व अश्रद्धालु महिलाओं को मंदिर में जबरन प्रवेश की सुविधा मुहैया करवाई।

राष्ट्रीय सुरक्षा व पुलवामा हमला : राष्ट्र विरोधी तत्वों की मदद से बाहरी ताकतें हिंसा की घटनाओं को अंजाम दे रही हैं। सेना व प्रतिरक्षा बलों के शिविरों पर हमले, पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ संबंधी हमले और हालिया पुलवामा आतंकी हमला काफी दुखद हैं। किसी को हमारी सहिष्णुता को हमारी कमजोरी के संकेत के रूप में नहीं लेना चाहिए।

राम-जन्मभूमि मामला : लंबे समय तक चले विवाद को खत्म करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया तेज करने के बजाय सर्वोच्च न्यायालय ने चौंकाने वाला रुख अपनाया। यह कि सर्वोच्च न्यायालय के पास हिंदू समाज की गहरी आस्था से जुड़े इस संवदेनशील विषय के लिए कोई प्राथमिकता नहीं हो। हम देख रहे हैं कि हिंदुओं की निरंतर उपेक्षा हो रही है। न्याय प्रणाली का पूरा सम्मान करते हुए हम कहना चाहेंगे कि विवाद का फैसला शीघ्र हो और भव्य मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर हों।

(सूत्र : आठ मार्च को जारी आरएसएस की सालाना रिपोर्ट 2019)

आरएसएस के पदाधिकारी : आरएसएस इस बात पर बल देता है कि वह भाजपा को सिर्फ सुझाव देता है न कि निर्देश। लेकिन आरएसएस के सभी पदाधिकारी सरकार की आंख, कान और दिमाग हैं, क्योंकि वे जनसमूह के बीच काम करते हैं।

चुनाव क्षेत्र से उम्मीदवारों के चयन पर फीडबैक देने से लेकर दरवाजे-दरवाजे पहुंचकर आरएसएस के कार्यकर्ता भाजपा के पक्ष में समर्थन जुटाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

आरएसएस के प्रमुख पदाधिकारी लोकसभा चुनाव के दौरान पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये पदाधिकारी हैं :

सुरेश भैयाजी जोशी : आरएसएस में दूसरे स्थान पर रहने वाले भैयाजी जोशी आरएसएस और भाजपा के बीच समन्वय स्थापित करते हैं। आरएसएस के संचाल व कार्यकारी प्रमुख के रूप में जोशी नियमित शाखाओं की संख्या बढ़ाने में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि समाज सिर्फ संविधान से ही नहीं चलता है, बल्कि परंपराओं और विश्वास के लिए भी समाज में जगह होती है।

दत्तात्रेय होसबोले : आरएसएस के सह-सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले संगठनात्मक मसलों पर जोशी की मदद करते रहे हैं और उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी। वह खुद लखनऊ में भाजपा नेताओं के साथ काम कर रहे थे।

डॉ. कृष्ण गोपाल : आरएसएस के सह-सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल लोकसभा चुनाव 2019 के लिए संघ और भाजपा के बीच के मसलों को संभालते हैं। उनकी वही भूमिका है, जो 2014 के लोकसभा चुनाव में सुरेश सोनी की थी।

वी. भागैया : सह-सरकार्यवाह वी. भागैया ओबीसी चेहरा हैं। वह दक्षिण के प्रांत आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में संघ के विस्तार का प्रबंधन कर रहे हैं।

अरुण कुमार : वह आरएसएस के संचार विभाग के प्रमुख हैं। अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार राष्ट्रीय स्तर के मीडिया से बातचीत करते हैं और आरएसएस के विचार रखते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई साल तक काम किया है।

--आईएएनएस

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बेंगलुरू: कर्नाटक में कांग्रेस नेता ए.मंजू ने लोकसभा चुनाव के लिए जनता दल (सेकुलर) से गठबंधन करने के मुद्दे पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। मंजू ने राज्य कांग्रेस प्रमुख दिनेश गुंडू राव को 17 मार्च को लिखे पत्र में कहा, "कांग्रेस में उठाए गए हालिया कदम, खासकर के जद (एस) के साथ गठबंधन एक अनर्थकारी कदम है।"

मंजू रविवार को हासन जिले में भाजपा में शामिल हो गए।

वह जिले से तीन बार विधायक रहे हैं और पूर्व पशुपालन व मत्स्यपालन मंत्री भी रहे हैं।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सीट बंटवारे के बाद उनकी नवादा सीट लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के खाते में चले जाने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का दर्द छलक उठा है। अपने तल्ख बयानों से सुर्खियों में रहनेवाले भाजपा नेता ने यहां सोमवार को ठंडे लहजे में कहा, "'मुझे नहीं पता कि मेरे साथ ये क्यों हुआ? मैंने अंतिम समय तक कहा था कि मैं चुनाव लड़ूंगा, तो नवादा से लडूंगा।" केंद्रीय मंत्री को मलाल है कि नवादा में उन्होंने जो 'रूरल मॉडल' खड़ा किया, उसका फायदा वहां के लोगों को मिलेगा, मगर उन्हें नहीं मिल पाएगा।

मोदी विरोधियों को पाकिस्तान चले जाने की नसीहत देने, सोनिया गांधी को 'पूतना' और राहुल गांधी को 'विदेशी तोता' कहकर सुर्खियां बटोरनेवाले गिरिराज सिंह ने नवादा का टिकट कट जाने के बाद पहली बार पत्रकारों के सामने आए और कहा, "मुझे नहीं पता कि मेरा टिकट नवादा से क्यों काटा गया और यह सीट लोजपा को क्यों दी गई।"

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि मेरे साथ ये क्यों हुआ? मैंने अंतिम समय तक कहा था कि मैं चुनाव लड़ूंगा, तो नवादा से लडूंगा। इसका जवाब तो अध्यक्ष ही दे सकते हैं।"

बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं कार्यकर्ता था, कार्यकर्ता हूं और आगे भी रहूंगा। मैं नेता बनकर पार्टी में नहीं आया था।"

उन्होंने नवादा में शुरू कराए कार्यो से जुड़े रहने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, "मेरी कमजोरी मानिए या मेरी विशेषता, मुझे जहां काम मिलता है, जिम्मेदारी से संभातला हूं और इमोशनली जुड़ जाता हूं।"

राजग में शामिल तीनों दलों में आपसी सहमति बनने के बाद रविवार को सीट बंटवारे की घोषणा कर दी गई, जिसमें गिरिराज सिंह की मौजूदा लोकसभा सीट (नवादा) लोजपा के खाते में चली गई है। सूत्रों का कहना है कि गिरिराज को बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव मैदान से उतारा जा सकता है।

बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं। राजग में शामिल भाजपा और जद (यू) 17-17 जबकि लोजपा 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

--आईएएनएस

 

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पणजी: गोवा के नए मुख्यमंत्री अपराह्न् तीन बजे के बाद शपथ लेंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विनय तेंदुलकर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। पत्रकारों से बात करते हुए तेंदुलकर ने कहा कि सरकार गठन से संबंधित सारे मुद्दे बहुत जल्द सुलझा लिए जाएंगे। उनके साथ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों में से एक विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के रविवार शाम को निधन के बाद से ही, भाजपा गठबंधन सरकार बनाने और मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति तक पहुंचने के लिए अपने संभावित राजनीतिक सहयोगियों से बातचीत कर रही है।

--आईएएनएस

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पणजी: गोवा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इकाई ने सोमवार को कहा कि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का अंतिम संस्कार सरकार बनाने से ज्यादा जरूरी है। नितिन गडकरी और पार्टी के महासचिव बी.एल. संतोष समेत भाजपा नेताओं तथा गठबंधन सहयोगियों के बीच रविवार रात में हुई बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। गडकरी, संतोष, अन्य राज्यों के भाजपा नेताओं के साथ रातभर चली बैठक के बाद गोवा फॉरवार्ड विधायक विजय सरदेसाई ने कहा कि बैठक में कोई निर्णय नहीं निकल सका। उनकी पार्टी के विधायक माइकल लोबो ने दावा किया है कि पूर्व लोक निर्माण विभाग मंत्री और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) नेता सुदिन धावलिकर ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश किया है।

सोमवार तड़के पहले दौर की वार्ता विफल होने के बाद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विनय तेंदुलकर ने कहा कि पर्रिकर के अंतिम संस्कार के बाद ही सरकार निर्माण की प्रक्रिया के बारे में दोबारा चर्चा होगी।

सिटी रिसोर्ट में पहले दौर की बैठक के बाद सोमवार सुबह तेंदुलकर ने संवाददाताओं से कहा, "हमें सबसे पहले उनके पार्थिव शरीर के दर्शन करने जाना है। इसके बाद उनके शरीर को पार्टी कार्यालय लाया जाएगा और इसके बाद निर्णय लिया जाएगा।"

लोबो ने तेंदुलकर के बयान का समर्थन करते हुए कहा, "आज (सोमवार) मनोहर जी का अंतिम संस्कार और अन्य काम होने हैं। यह प्राथमिकता है। समाधान कल निकल आएगा।"

भाजपा विधायक ने भी कहा कि गडकरी और संतोष के साथ बैठक में धावलिकर ने एक प्रस्ताव रखते हुए उन्हें गठबंधन सरकार का मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की।

तेंदुलकर ने कहा, "धावलिकर मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। उन्होंने अपनी मांग रखी है। इस पर विचार हो रहा है। धावलकर ने कहा कि उन्होंने भाजपा को समर्थन देकर कई बार त्याग किया है। लेकिन भाजपा उनकी मांग नहीं मानेगी।"

लोबो ने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए विश्वजीत राणे तथा प्रमोद सावंत के नाम चुने हैं।

--आईएएनएस

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चंडीगढ़: बॉलीवुड फिल्मों की सबसे अच्छी 'मम्मीजी' की पहचान रखने वाली किरण खेर ने चंडीगढ़ लोकसभा सीट फिर से जीतने के लिए चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। दो महीने से ज्यादा चलनेवाले प्रचार अभियान के दौरान यहां के लोगों को उनका मां अवतार फिर से देखने को मिल रहा है।

वर्ष 2014 के आम चुनाव में किरण खेर ने चार बार सांसद रहे पूर्व रेलमंत्री पवन कुमार बंसल को लगभग 70,000 मतों के अंतर से हराया था। अभिनेत्री से राजनेत्री बनी अनुपम खेर की पत्नी का भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव का यह पहला अनुभव था।

चंडीगढ़ की रहनेवाली 63 साल की किरण को इस बार न केवल कांग्रेस से, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थानीय इकाई से भी कड़ी चुनौती मिल रही है।

चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन और इस केंद्र शासित शहर के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन इस बार किरण की राह में टिकट के दावेदार के रूप में खड़े हो गए हैं। ये दोनों पिछले चुनाव में भी यहां से टिकट के लिए काफी कोशिशें की थी, लेकिन किरण अपनी गोटी लाल करने में कामयाब रहीं।

किरण ने लोकप्रिय टीवी चैट शो 'कॉफी विद करण' (निर्देशक करण जौहर ) की तर्ज पर यहां स्थानीय तौर पर 'हैशटैग कॉफी विद किरण' कार्यक्रम शुरू किया है। उनके ट्विटर हैंडल देखने से पता चलता है कि उन्हें भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और सेलेब्रिटी की अपनी हैसियत की बदौलत वह मतदाताओं को प्रभावित कर पाएंगी।

भाजपा के एक स्थानीय नेता ने आईएएनएस से कहा, "किसी भी बड़े स्थानीय नेता को उनके साथ प्रचार करते नहीं देखा जा रहा है। टिकट का निर्णय होने तक कोई भी उन्हें उम्मीदवार के रूप में पेश करने को तैयार नहीं है, जबकि वह मौजूदा सांसद हैं।" किरण फिलहाल जाती तौर पर वकीलों, उद्योगपतियों, गृहणियों, युवाओं, बच्चों, व्यवसायियों और कई अन्य तबकों से मिल रही हैं।

किरण खेर के कार्यकमों में शामिल होती रहीं एक गृहणी अंजलि ने आईएएनएस से कहा, "स्टार के रूप में रुतबा उनका आकर्षण जरूर है, लेकिन यह वोट में तब्दील होगा, यह जरूरी नहीं है।"

उधर, भाजपा नेता संजय टंडन अलग से 'चाय पे चर्चा' चला रहे हैं। पूर्व सांसद सत्यपाल जैन भी अलग कार्यक्रम कर रहे हैं। दोनों को एक-दूसरे के कार्यक्रम में नहीं देखा जा रहा है। इधर, किरण खेर को पांच साल में किए अपने काम और शोहरत पर भरोसा है।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी भाजपा ने रविवार को अरुणाचल विधानसभा चुनाव के लिए 54 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। यहां मतदान 11 अप्रैल को होना है। सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री पेमा खांडू तवांग जिले की मुकतो सीट से चुनाव लड़ेंगे और वित्तमंत्री चौना मीन चौखमा सीट से उम्मीदवार होंगे।

कांग्रेस के नबाम तुकी के इस्तीफा देने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद 2016 में खांडू मुख्यमंत्री बने थे।

खांडू 2011 में मुकतो सीट के लिए हुए उपचुनाव के जरिए कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे पेमा खांडू उसी सीट से 2014 में निर्विरोध निर्वाचित हुए।

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने शनिवार को एक मैराथन बैठक में उम्मीदवारों का चयन किया था।

--आईएएनएस

 

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