क्रेडिट सुधार ने 'पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन' लांच किया

भारत में क्रेडिट ऐडवाइजरी तथा प्रत्येक यूजर के क्रेडिट प्रोफाइल के मुताबिक वित्तीय उत्पाद पेश करने वाली कंपनी क्रेडिट सुधार ने शुक्रवार को माय डिजिटल प्रोटेक्शन के सहयोग से 'पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन' के लांच की घोषणा की है। 

कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह डिजिटल वल्र्ड में ग्राहकों को सुरक्षित रहने के लिए इनोवेटिव और उपयोगी समाधान मुहैया कराने की एक पहल है। 'पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन' को इसलिए डिजाइन किया गया है ताकि वित्तीय एवं निजी आंकड़ों को ऑनलाइन सुरक्षित रखा जा सके।

क्रेडिट सुधार के निदेशक अरुण रामामूर्ति ने कहा, "भारत में हर 10 मिनट में एक साइबर अपराध की सूचना दर्ज होती है जिनमें रैनसमवेयर से लेकर फिशिंग व स्कैनिंग रैकेट तक शामिल हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह सूचना वास्तविक संख्या का एक छोटा सा हिस्सा हो। क्रेडिट सुधार में हम भारतीय उपभोक्ताओं को ऐसे समाधान देना चाहते हैं जो उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षा प्रदान करें, क्योंकि डिजिटल इंडिया का विस्तार हो रहा है और इसके साथ ही लोगों की डिजिटल उपस्थिति में भी वृद्धि हो रही है।"

उन्होंने आगे कहा, "'पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन' की पेशकश के साथ क्रेडिट सुधार ने न सिर्फ उत्पादों व सेवाओं के अपने पोर्टफोलियो को मजबूत बनाया है बल्कि फाइनेंस टेक्नोलॉजी में बतौर लीडर अपनी स्थिति को भी पुख्ता किया है।"

बयान में कहा गया कि 'पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन' सॉल्यूशन उपभोक्ताओं व उद्यमों को पब्लिक वेब और डार्क वेब पर निगरानी रखने में सक्षम बनाता है ताकि डाटा बिंदुओं से संबंधित जोखिमों की जानकारी हासिल की जा सके। इस प्रोसेस में क्षमता है कि क्रेडिट व डेबिट कार्ड नंबरों, बैंक अकाउंट नंबरों और निजी पहचान दस्तावेजों के नंबर जैसे पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस को ट्रैक किया जा सके। 

माय डिजिटल प्रोटेक्शन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित संजीव ने कहा, "भारत सरकार की सक्रियता के चलते देश बड़ी तेजी से डिजिटल यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। नेटीजंस अब ऐसी वर्चुअल लाइफ जीने लगे हैं जैसी पहले कभी नहीं जिया करते थे, आज वे सभी किस्म की वित्तीय और निजी जानकारी ऑनलाइन व ऑफलाइन साझा कर रहे हैं। किंतु ऑनलाइन फ्रॉड और इंटरनेट हैकिंग के चलते इस वृद्धि से निजी पहचान पर बहुत जोखिम उत्पन्न हो गया है।"

रामामूर्ति ने कहा, "डाटा पर जोखिम के बारे में जागरूकता से निवारक कदम उठाने में मदद मिलेगी और वित्तीय नुकसान की रोकथाम होगी।"

बयान में आगे कहा गया कि साइबर अपराध नए युग का अपराध है जहां लोगों को बहुत लंबे समय तक मालूम नहीं चलता कि उन्हें शिकार बनाया गया है। भले ही भारत आईटी का केन्द्र है किंतु लोगों में इस संबंध में जागरूकता नहीं है इसलिए डिजिटलीकरण में तीव्र वृद्धि के साथ जोखिम भी तीव्रता से बढ़ता जाएगा। हाल ही में बड़े पैमाने पर ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनसे मालूम चलता है कि इस क्षेत्र में समाधानों की आवश्यकता बढ़ रही है।

--आईएएनएस

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