गिग इकॉनमी ने 58 फीसदी महिलाओं को बनाए उद्यमी : रिपोर्ट
Saturday, 08 September 2018 08:17

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गिग इकॉनमी अर्थात स्वतंत्र रोजगार की तेजी से बढ़ती इंडस्ट्री ने स्टूडेंट हो या कार्यकुशल महिलाएं व पुरुष सभी के लिए रोजगार के अपार अवसर खोल दिए हैं। खासकर महिलाओं को गिग इकॉनमी का सबसे अधिक लाभ मिल रहा है। फ्लेक्सीओआरजी द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक 58 फीसदी महिलाएं स्वतंत्र रोजगार के द्वारा सफल उद्यमी बन पाई हैं। गिग इकॉनमी में डिजिटल मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, कॉटेंट मैनेजमेंट, लीगल का फ्रीलांसिंग काम शामिल है। 

इस अध्ययन में 2500 स्वतंत्र कार्य करने वाली महिलाओं पर की गई यह जानने की कोशिश की गई कि किस वजह से महिलाएं स्वतंत्र रोजगार विकल्प को चुनती हैं? कितनी आय अर्जित कर पाती हैं? किस तरह के स्वतंत्र रोजगार विकल्प को चुनना पसंद करती हैं? और किस तरह की चुनौती का सामना करना पड़ता है?

अध्ययन में पाया गया है कि 58 फीसदी महिलाएं फ्रीलांस कार्यों को करके एक सफल उद्यमी बन चुकी हैं। ये महिलाएं 18 से 35 वर्ष की आयु वर्ग की पाई गईं। वहीं 30 फीसदी महिलाएं 30 से 35 वर्ष की थीं, और 12 प्रतिशत 51 से 65 वर्ष आयु वर्ग की थी। ज्यादातर महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं, जिनमें 88 फीसदी महिलाओं ने कॉलेज तक पढ़ाई की है। 70 फीसदी महिलाएं ऐसी पाई गईं, जिनके लिए गिग इकॉनमी आय का मुख्य साधन है।

अध्ययन में पाया गया कि लगभग 33 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं, जो नौकरी के साथ-साथ अपने गिग असाइनमेंट पूरे करके एक अच्छी आय अर्जित कर रही हैं, जबकि 48 फीसदी ने नौकरी छोड़ कर गिग इकॉनमी प्रोफेशन, फ्रीलांस वर्क को ही अपनी आय का मुख्य साधन बनाया हुआ है और वे नौकरी से अधिक कमा रही हैं।

गिग इकॉनमी प्रोफेशनल 37 वर्षीय रीना उप्पल का मानना है कि गिग इकॉनमी प्रोफेशन में कोई भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ता, दूसरे आप अपने कम्फर्ट के अनुसार काम कर सकते हैं। सबसे अहम हमें अपने परिवार का ध्यान रखने का समय मिल जाता है। 

फ्लेक्सीओआरजी के संस्थापक और फ्यूचर ऑफ वर्क स्ट्रेजिस्ट अजय शर्मा ने कहा, "भारत में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन आय मिलती है। जबकि गिग इकॉनमी प्रोफेशन एक मात्र ऐसा साधन है जहां महिलाओं व पुरुषों की आय में ज्यादा अंतर नहीं है।"

--आईएएनएस

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