भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष के दौरान 11.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान: मूडीज
Saturday, 12 September 2020 09:09

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नई दिल्ली: मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने वित्त वर्ष 2020 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान घटा दिया है। मूडीज ने पहले इसमें जहां चार फीसदी गिरावट का अनुमान जताया था, वहीं शुक्रवार को इसने माइनस जीडीपी की संकुचन दर 11.5 फीसदी रहने की संभावना जताई है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी।

मूडीज ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पूवार्नुमान को संशोधित किया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 10.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने का अनुमान जताया है, जबकि इससे पहले उसने अगले वित्तीय वर्ष में 8.7 फीसदी की वृद्धि की भविष्यवाणी की थी।

मूडीज की ओर से जारी बयान में कहा गया है, देश के नीति निर्धारक संस्थानों ने इन जोखिमों को कम करने और नियंत्रित करने के लिए संघर्ष किया है, जो कोरोनावायरस महामारी के कारण बढ़ गए हैं।

मूडीज ने कहा, अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में गहरे दबाव से देश की वित्तीय मजबूती (राजकोषीय स्थिति) में और गिरावट आ सकती है। इससे साख पर दबाव और बढ़ सकता है।

इससे पहले विश्वस्तरीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की संप्रभु रेटिंग घटा दी थी। रेटिंग एजेंसी ने देश की रेटिंग को बीएए 2 से घटाकर बीएए 3 कर दिया था। रेटिंग एजेंसी ने करीब तीन महीने पहले भारत की संप्रभु रेटिंग कम करते हुए कहा था कि लंबे समय तक संभावित आर्थिक सुस्ती और खराब होती जा रही वित्तीय स्थिति से निपटने की नीतियों को लागू करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।

वहीं शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया है कि नकारात्मक दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में संभावित गहरे दबावों से पारस्परिक रूप से नकारात्मक जोखिमों को मजबूत करने को दर्शाता है, जो वर्तमान में अनुमानित तुलना में राजकोषीय ताकत में अधिक गंभीर और लंबे समय तक क्षरण का कारण बन सकता है।

एजेंसी ने कहा कि कमजोर बुनियादी ढांचे, श्रम, भूमि और उत्पाद बाजारों में कठोरता और वित्तीय क्षेत्र के बढ़ते जोखिम सहित विकास संबंधी चुनौतियां लगातार अर्थव्यवस्था की क्षमता को बाधित करना जारी रखे हुए है। इसने कहा है कि ये संरचनात्मक कमजोरियां घरेलू या बाहरी झटके से अर्थव्यवस्था की रिकवरी को काफी हद तक बिगाड़ सकती हैं।

इसके अलावा, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफआई) और बैंकों के बीच दबाव की प्रकृति अभी भी प्रकट हो रही है और यह अब तक के आकलन से अधिक गहरे और व्यापक साबित हो सकते हैं।

एजेंसी ने जीडीपी विकास के बाधित होने का बात कहते हुए कहा है कि वित्तीय संस्थानों की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ेगा।

मूडीज ने कहा, विकास के लिए जोखिमों को कम करना चाहिए या वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना चाहिए, भारत की राजकोषीय मजबूती के लिए नकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। अपेक्षाकृत अधिक विकास की अवधि जितनी लंबी होगी, उतनी ही अधिक मात्रा में भारत के कर्ज का बोझ बढ़ता रहेगा।

बता दें कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी में 23.9 फीसदी की तेज गिरावट देखने को मिली है। मूडीज के साथ ही अन्य कई एजेंसियों ने भी भारत की विकास दर का पहिया थमने की बात कही है।

--आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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