अमेरिका के पास हैं तीन अचूक हथियार, बिना विस्फोट कराए गिरा सकता है उत्तर कोरिया की मिसाइल

उत्तरी कोरिया का सनकी तानाशाह किम जोंग लगातार सैन्य ताकत बढ़ाने और उसका प्रदर्शन करने पर आमादा है। रविवार (03 सितंबर) को ही उत्तरी कोरिया ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया है। इससे दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका समेत पूरा विश्व चिंतित है। हाइड्रोजन बम के परीक्षण ने सबकी नींद उड़ा दी है क्योंकि इसकी ताकत 50 से 120 किलो टन विस्फोटक के बराबर होगी जो 1945 में हीरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से कई गुणा ज्यादा है। बता दें कि हीरोशिमा पर गिराए गए बम की विस्फोटक क्षमता 15 किलो टन थी। इस हमले में उस वक्त 80,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इसके अलावा आजतक वहां पीढ़ी की पीढ़ी विकलांग पैदा हो रही है।

इसके अलावा उत्तरी कोरिया के पास बैलेस्टिक मिसाइल भी है, जिससे मध्यम और लंबी दूरी तक लक्षित हमला किया जा सकता है। उत्तरी कोरिया कई बार अमेरिका को भी धमकी दे चुका है और कह चुका है कि उत्तरी कोरिया प्रशांत महासागर क्षेत्र के गुआम पर मिसाइल हमले की योजना बना रहा है। इसके अलावा उत्तरी कोरिया गुआम के आसपास के क्षेत्रों में मध्य-से-लंबी दूरी के रणनीतिक बैलिस्टिक रॉकेट ह्वासोंग -12 के साथ-साथ गुआम पर अमेरिका के प्रमुख सैन्य ठिकानों पर भी निशाना साध सकता है।

उधर, अमेरिका भी चुपचाप नहीं बैठा है। उसने भी युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए हर तरह की तैयारी कर रखी है। सूत्र बताते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बिना परमाणु विस्फोट कराए ही उत्तरी कोरिया की मिसाइल को फुस्स कर सकते हैं। इसके लिए अमेरिका पहले से तैयारी करते हुए दक्षिण कोरिया में ‘थाड़’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती कर चुका है। युद्ध की स्थिति में अमेरिका का यह पहला ब्रह्मास्त्र होगा जो दुश्मन के बैलेस्टिक मिसाइल को ना केवल डिटेक्ट करेगा बल्कि रास्ते में ही उसे गिरा देगा। यह सूक्ष्म, मध्यम और इंटरमीडिएट बैलेस्टिक मिसाइल को भेदने में सक्षम है। अमेरिका द्वारा युद्ध की स्थिति में उत्तर कोरिया से निपटने के लिए तैनात तीन अचूक सुरक्षा तंत्र।

अमेरिका का दूसरा ब्रह्मास्त्र एजीज वारशिप है, जो एकसाथ ना केवल 100 मिसाइल को ट्रैक कर सकता है, बल्कि उस पर धावा भी बोल सकता है। अगर पहला ब्रह्मास्त्र ‘थाड़’ चूक जाता है तो अमेरिका इसका उपयोग करेगा और रास्ते में ही दुश्मन की मिसाइल की पहचान कर, उस पर सटीक निशाना लगा सकता है। यह थाड़ और अन्य प्रणालियों से सीधे डाटा और इन्फॉरमेशन कलेक्ट कर सकता है और शेयर कर सकता है। अमेरिका इसकी तैनाती प्रशांत महासागर में कर चुका है।अमेरिका के पास तीसरा विशाल सुरक्षा कवच के रूप में पैट्रियट एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। पहले दोनों सुरक्षा कवच के फेल होने की सूरत में अमेरिका इसका इस्तेमाल कर सकता है। पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी दुश्मन के मिसाइल को भांपने और भेदने में सक्षम है। यह अमेरिका का 40 साल पुराना परखा और आजमाया हुआ ब्रह्मास्त्र है। हाल के दिनों में नॉर्थ कोरिया द्वारा गुआम द्वीप पर बैलेस्टिक मिसाइलें दागने की धमकी के बाद जापान इसे तैनात कर रहा है। यह क्षेत्र प्रशासनिक रूप से अमेरिका के अधीन आता है।

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