महिला जासूस माताहारी, जिसने अपने उत्तेजक डांस से उगलवाए कई राज!

एक कामुक डांसर


माताहारी का असली नाम मार्गरेट गीर्तोईदा जेले था, जोकि एक शानदार डांसर थी। इनके डांस के दिवानों की सूची में विश्व के कई मशहूर हस्तियां भी शामिल थी। बाद में माताहारी ने इसी डांस के दम पर जासूसी की दुनिया में कदम रखा और अपने कारनामों की वजह से हमेशा के लिए अमर हो गईं।

माताहारी शारिरक संबंध


माताहारी के उत्तेजक डांस के दीवाने थे लोग प्रथम विश्व युद्ध के समय माताहारी की शोहरत बुलंदी पर थी। इनके डांस के दीवानों में राजा-महाराजा से लगाए यूरोप के कई देशों के शीर्ष सेना अधिकारी और ताकतवर हस्तियां शामिल थी। पेशे से डांसर माताहारी अपने उत्तेजक डांस के इन लोगों को लुभाती और मनचाहा राज उगलवा लेती। कहा जाता है कि मनचाहा राज उगलवाने के लिए माताहारी शारिरक संबंध बनाने से भी गुरेज नहीं करती थी।

फ्रांस की जासूसी के लिए भेजा गया


प्रथम विश्वयुद्ध के समय दो देशों के लिए की जासूसी प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान माताहारी की काबिलियत देख जर्मनी ने इन्हें फ्रांस की जासूसी के लिए भेजा। माताहारी फ्रांसीसी सेना के अफसरों को अपने डांस से लुभातीं और उनके राज पता करतीं लेकिन एक दिन माताहारी का यह राज खुल गया और फ्रांस की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। माताहारी की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि वह पहले फ्रांस की जासूस थीं और फ्रांस के लिए जर्मनी की जासूसी करती थीं जिसके लिए उन्हें अच्छी खासी रकम दी जाती थी लेकिन पैसों के लालच में पड़ जर्मनी के लिए भी जासूसी करना शुरू कर दिया था।

पूरे यूरोप में मशहूर


माताहारी का पति उन्हें रोज मारता था माताहारी का 1876 में नीदरलैंड्स में हुआ था। पूरी दुनिया घूमने की चाह रखने वाली माताहारी ने 18 साल की उम्र में अपने से दोगुने उम्र के एक डच सैन्य अधिकारी से शादी कर ली जोकि इंडोनेशिया में रहता था।म माताहारी का पति शराबी था जो रोज शराब पीकर उन्हें यातनाएं देता और मारता था। माताहारी को इस दौरान दो बच्चे भी हुए। 1902 में माताहारी ने पति के व्यवहार से तंग आकर उसे छोड़ दिया और पेरिस आकर डांस सीखने लगीं। यहीं पर उन्होंने पुरुषों को डांस की मदद से लुभाना सीखा। धीरे-धीरे माताहारी का उत्तेजक डांस पूरे यूरोप में मशहूर हो गया।

गोली मार कर हत्या


गोली मार कर माताहारी को उतारा मौत के घाट फ्रांसीसी सरकार ने माताहारी को जर्मनी के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया। फ्रांस सरकार का कहना था कि माताहारी की जासूसी की वजस से 50 हजार लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। हालांकि माताहारी ने कभी जासूसी करने की बात नहीं कबूली। 15 अक्टूबर 1917 को फ्रांस ने उन्हें गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया गया। गोली मारते उनकी आंखो पर पट्टी बांधी जा रही थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

खुली आंखों से अपनी मौत

माताहारी का कहना था कि मैं खुली आंखों से अपनी मौत देखना चाहती हूं। दुनिया की पहली नारीवादी माताहारी के जीवन पर किताब लिखने वाले ब्राजील के लेखक पाउलो कोएलो ने माताहारी को दुनिया की पहली नारीवादी महिला बताया। पाउलो ने लिखा है कि माताहारी ने अपने लिए एक आजाद जीवन चुना जो परंपराओं में बंधा नहीं था। माता हारी का जुर्म बस इतना था कि वह एक आजाद औरत थी।

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