2 करोड़ लोग अकाल के कगार पर

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) का कहना है कि कुछ अफ्रीकी देशों और यमन में दो करोड़ लोग अकाल के कगार पर हैं। अफ्रीका के पूर्वोत्तर नाइजीरिया, सोमालिया, दक्षिण सूडान और पश्चिम एशिया स्थित यमन के लोग सूखे और बोको हराम एवं अल शबाब जैसे आतंकवादी संगठनों के हमले की वजह से अभूतपूर्व मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, डब्ल्यूएफपी के आपाताकल मामलों की निदेशक डेनीज ब्राउन ने गुरुवार को रोम में कहा, "यह अब तक का सबसे बड़ा संकट है, जैसा हमने पहले कभी नहीं देखा।"

डेनीज ने कहा कि 'लाखों लोग एक खड़ी चट्टान के किनारे तक पहुंच गए हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।'

एफएओ के आपातकाल एवं पुनर्वास प्रभाग के निदेशक डोमिनिक बर्जन के मुताबिक, संघर्ष और प्रतिकूल जलवायु की वजह से जानवर मर रहे हैं और कृषियोग्य भूमि खाली पड़ी हुई है, और यह दुनिया के एक ऐसे हिस्से में हो रहा है जहां की अस्सी फीसदी आबादी खेती और मत्स्यपालन पर निर्भर है।

वरिष्ठ स्टाफकर्मियों के मुताबिक, यदि जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो 2010-2011 में सोमालिया में फैली भुखमरी जैसे हालात पैदा होंगे। सोमालिया में 2010-2011 के दौरान हुए अकाल में 250,00 लोगों की मौत हो गई थी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने समय पर उचित कदम नहीं उठाए थे।

डब्ल्यूएफपी प्रमुख एवं अर्थशास्त्री आरिफ हुसैन ने बताया कि जब किसी देश की 20 फीसदी आबादी भूख से पीड़ित हो, 30 फीसदी बच्चे बुरी तरह से कुपोषित हों और मृत्यु दर औसत से दोगुनी हो जाए तो उस स्थिति को अकाल कहा जाता है।