तुर्की की संसद में संविधान संशोधन पर बहस

अंकारा:  तुर्की की 'ग्रैंड नेशनल असेंबली' में मंगलवार को संविधान संशोधन पर बहस शुरू हो गई है। संशोधन मंजूर होने पर राष्ट्रपति को व्यापक शक्तियां हासिल हो जाएंगी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के हवाले से बताया कि संसद के 550 सांसदों में से 338 ने 18 संवैधानिक अनुच्छेदों पर बहस शुरू करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। प्रस्ताव सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) और नेशनल मूवमेंट पार्टी (एमएचपी) ने रखा था।

बहस के दौरान प्रधानमंत्री बिनाली यिल्दरिम ने कहा कि "प्रस्ताव में उल्लिखित नियमों से तुर्की की भविष्य की समस्याओं का समाधान होगा।"

एकेपी वर्तमान संसदीय प्रणाली के स्थान पर राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान प्रणाली में कई खामियां हैं, जिनके कारण तुर्की के विकास में बाधा आ रही है।

सरकार संसद की मंजूरी के बाद प्रस्ताव पर जनमत संग्रह कराने पर विचार कर रही है।

जनमत संग्रह की स्थिति तक पहुंचने के लिए प्रस्तावित संशोधन को 330 सांसदों की स्वीकृति की जरूरत है। अगर प्रस्ताव को 367 सांसदों का समर्थन मिल जाएगा, तो उसे बिना जनमत संग्रह के भी कानून बनाया जा सकता है। हालांकि सत्तारूढ़ एकेपी ने कहा है कि वह किसी भी स्थिति में पॉपुलर वोट कराएगी।

हुर्रियत डेली न्यूज के मुताबिक, प्रमुख विपक्षी पार्टी 'रिपब्लिकंस पीपुल्स पार्टी (सीएचपी)' के नेता केमल किलिकदारोग्लू ने संविधान संशोधन की निंदा की है। उनका कहना है कि इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसद जनता को धोखा दे रहे हैं।

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