बांग्लादेश सरकार की ब्लॉग्रों पर कार्रवाई ने तूल पकड़ा

मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राईट्स वॉच' ने गुरुवार को कहा कि बांग्लादेश सरकार को इस महीने गिरफ्तार चार ब्लॉग्रों और एक समाचार संपादक पर से तुरंत मुकदमा खत्म करते हुए बरी कर देना चााहिए। संगठन ने अपने बयान में कहा कि ये पांचों व्यक्ति महज अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का शांतिपूर्वक इस्तेमाल करने के लिए आपराधिक मुकदमा का सामना कर रहे हैं।

ह्यूमन राईट्स वॉच ने कहा कि सरकार को आपत्तिजनक सामग्री छापने के नाम पर किसी व्यक्ति और मीडिया को निशाना बनाना बंद करना चाहिए। उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी वचनबद्धता व्यक्त करनी चाहिए। यह ऐसे सिद्धांत है जिसमें सत्तारूढ़ अवामी लीग चैंपियन होने का दावा कर चुकी है।

ह्यूमन राईट वॉच के ब्रैड एडम्स ने कहा, "मीडिया और ब्लॉग में शातिपूर्ण आलोचना पर निशाना बनाकर और लोगों को गिरफ्तार कर सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से मुंह मोड़ रही है।"

पुलिस ने 2 और 3 अप्रैल को चार ब्लागरों सुब्रत अधिकारी शुवो, मशीउर रहमान बिप्लब, रासेल परवेज और आसिफ मोहिउद्दीन को गिरफ्तार किया था। उन्होंने सोशल नेटवर्क साइट पर लिखे अपने लेख में मुस्लिम कट्टरपंथियों को तुष्ट करने के लिए सरकार की आलोचना की थी । उन्होंने कहा था कि सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों की परेशानियों के समाधान करने में नाकाम रही है।

पुलिस ने इन चार ब्लॉग्रों को 'जाना-माना नास्तिक और प्रकृतिवादी'

बताया था, जो पैगंबर के खिलाफ अपमानजनक बातें करते हैं।

वहीं, एडम्स ने कहा, "इन ब्लॉग्रों को केवल राजनीतिक कैदी ही कहा जा सकता है, क्योंकि ये शांतिपूर्वक अपने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जेल में हैं।"

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने 5 फरवरी को जमात-ए-इस्लामी के नेता अब्दुल कादिर मुल्ला को आजीवन कारावास के बदले मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। उसके बाद से बांग्लादेश विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अशांति के गिरफ्त में है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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