फेसबुक पर सजेस्ट फ्रेंड टूल से संपर्क में आ रहे आईएस समर्थक

लंदन.5 करोड़ यूजर्स के डेटा लीक के बाद फेसबुक के जरिए आतंकी सगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को मदद मिलने की बात सामने आई है। एक अमेरिकी एनजीओ की रिपोेर्ट में दावा किया गया है कि दुनियाभर में आईएस का समर्थन करने वाले यूजर्स फेसबुक के सजेस्ट फ्रेंड टूल के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आ रहे हैं। हालांकि, फेसबुक आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे कंटेंट को हटा दिया है।

सोशल मीडिया पर रू-ब-रू हो रहे चरमपंथी

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दुनियाभर में चरमपंथियों पर नजर रखने वाले एनजीओ काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट (सीईपी) ने 96 देशों के 1000 आईएस समर्थकों की ऑनलाइन गतिविधियों का अध्ययन किया।

- रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएस समर्थकों के फेसबुक अकाउंट्स की निगरानी से पता चला कि इस्लामिक चरमपंथी नियमित रूप से सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। आईएस के इस नेटवर्क के लिए सोशल मीडिया एल्गोरिदम की मदद मिल रही है।

- विशेषज्ञों की मानें तो फेसबुक का सजेस्ट फ्रेंड फीचर यूजर्स को उनकी पसंद के लोगों से जुड़ने में मदद करता है। जब सीईपी के रिसर्चरों ने कुछ चरमपंथियों की प्रोफाइल खंगाली तो फेसबुक की ओर से स्वत: ही उन यूजर्स से दोस्ती का सुझाव मिलने लगा।

फेसबुक सिस्टम आतंकियों को मदद मिल रही

- रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़े रॉबर्ट पोस्टिंग ने विदेशी अखबार को बताया कि फेसबुक ने अनचाहे ही ऐसा तंत्र बना दिया है जो अब चरमपंथी और आतंकियों को एक दूसरे से जुड़ने में मदद कर रहा है। फेसबुक चरमपंथी कंटेट को तय नहीं कर पाया है।

- एक बार दोस्ती हो जाने पर चरमपंथी तेजी से लोगों को कट्टरता की ओर ले जाते हैं, जो आईएस के बारे में जानने के उत्सुक होते हैं। एक मामले में न्यूयॉर्क के एक गैर-मुस्लिम ने आईएस के चरमपंथी की फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की थी, इसके बाद 6 महीने में ही इसे कट्टर बना दिया गया।

चरमपंथ पर लगाम लगाना आसान नहीं है

- रिसर्च के दावों पर फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा, ''आतंकी हमारी सोशल नेटवर्किंग साइट का फायदा न उठा पाएं, इसके लिए कंपनी ने कड़े प्रावधान किए हैं, जिन्हें और मजबूत किया जा रहा है। पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फैलाए जा रहे चरमपंथ पर लगाम लगाना तकनीकी तौर पर आसान नहीं है। इसके अलावा कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव मध्यस्थ के जरिए कट्टरपंथी कंटेंट को साइट से हटा रही है।''

क्या है काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट?

- काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट (सीईपी) की स्थापना 2014 में की गई थी। ये एक गैर सरकारी संस्था है। सीईपी का उद्देश्य दुनियाभर में सोशल मीडिया पर बढ़ते चरमपंथ और आतंकी घटनाओं का विश्लेषण करना है। ये संस्था ऐसे लोगों का भी पर्दाफाश करती है जो चरमपंथियों को आर्थिक मदद करते हैं।

5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा हुआ था लीक

- चुनाव प्रचार में मदद करने वाली कैम्ब्रिज एनालिटिका पर 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा चुराकर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में इसका गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। - गार्डियन और न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट्स में खुलासा किया था कि ट्रम्प कैंपेन से जुड़ी ब्रिटिश फर्म एनालिटिका ने 2014 में फेसबुक यूजर्स का डेटा गलत तरीके से हासिल किया था। फेसबुक को इस बारे में जानकारी थी, लेकिन उसने यूजर्स को अलर्ट नहीं किया।

 

- फेसबुक ने एनालिटिका को अपने प्लेटफार्म से सस्पेंड कर दिया था और ये भरोसा भी दिलाया था कि फर्म ने डेटा डिलीट कर दिया है। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं।

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