बंगाल में जीएसटी के विरोध में 2 लाख मिठाई की दुकानें बंद

पश्चिम बंगाल में सोमवार को करीब दो लाख मिठाई की दुकानों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के विरोध में 24 घंटे का बंद रखा। सोमवार को हुए बंद के चलते राज्य में मिठाई उद्योग को 100 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

उत्तरी कोलकाता से दक्षिणी कोलकाता तक और कोलकाता के उपनगरीय इलाकों में लगभग सभी बड़े, मध्यम और छोटे आकार की लोकप्रिय दुकानें बंद रहीं।

1868 में रसगुल्ला की खोज करने वाले हलवाई नबीन चंद्र दास के खानदान से जुड़े और कोलकाता में बेहद मशहूर मिठाई निर्माता के. सी. दास की चारों दुकानें बंद रहीं।

के. सी. दास के निदेशक धीमान दास ने बताया, "पूरे दिन की बंदी के चलते दो से तीन लाख रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।"

मिठाई निर्माताओं ने आने वाले दिनों में जीएसटी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में तेजी लाने का भी संकल्प लिया।

पश्चिम बंगाल मिष्ठान्न व्यवसाय समिति के महासचिव आर. के. पॉल ने आईएएनएस को बताया, "हम जीएसटी को लेकर सहज नहीं हैं। 24 से 26 अगस्त के बीच हम भूख हड़ताल करेंगे। अगर केंद्र सरकार ने कर से छूट की हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो हम अपना विरोध प्रदर्शन और तेज करेंगे।"

उन्होंने कहा, "अगर दैनिक आधार पर जोड़ें तो हर दुकान की बिक्री 5000 रुपये आती है। अगर पूरे एक दिन दो लाख दुकानें बंद रहीं तो 100 करोड़ रुपये प्रति दिन का नुकसान हुआ।"

पॉल ने बताया कि सारे खर्चे निकाल दें तो 10 से 15 फीसदी की आय बैठती है।

पॉल ने कहा कि मिठाई उद्योग राज्य में 10 लाख लोगों को रोजदार देता है, जबकि मिठाई कारोबार से अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े लोगों की संख्या पता ही नहीं है।

1885 से मिठाई कारोबार में लगे बलराम मलिक और राधारमन मलिक से जब आईएएनएस ने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि वे भी इस हड़ताल में शामिल थे।

एक विक्रेता ने बताया, "अनधिकारिक तौर पर हमने अग्रिम ऑर्डर लेने और डिलिवरी देने के लिए दुकान खोल रखी थी। हमने सिर्फ पहले से ऑर्डर दे गए लोगों के साथ ही लेनदेन की। अन्य ग्राहकों को लौटा दिया गया।"

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