केदारनाथ में नदी किनारे निर्माण की अनुमति नहीं : बहुगुणा

नई दिल्ली: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शनिवार को यहां कहा कि केदारनाथ में और पास के अन्य तीर्थस्थलों में नदी तटों पर किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि स्थिर विकास सुनिश्चित कराने के लिए पुनर्निर्माण की एक योजना तैयार की गई है। बहुगुणा ने कहा, "हमने केदारनाथ और अन्य तीर्थस्थलों को 100, 200 या 300 सालों तक बचाए रखने के लिए पुनर्निर्माण एक बड़ी योजना तैयार की है। केदारनाथ में और अन्य तीर्थस्थलों में नदी तटों पर किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।"

इंडिया टीवी के साथ बातचीत में बहुगुणा ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर हिमालय क्षेत्र में भूकम्प, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के लिए चेतावनी देने वाली उन्नत प्रणाली की मांग की है।

उन्होंने कहा कि लगभग 300 गांवों को 8,000 करोड़ रुपये की लागत से फिर से बसाया जाएगा।

उन्होंने कहा, "हम भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और आईआईटी रुड़की से पुनर्निर्माण और पुनर्वास योजना पर बातचीत करेंगे।"

केदारनाथ में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के मद्देनजर बहुगुणा ने कहा, "अब से हम केदारनाथ और बद्रीनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों को नियंत्रित करने के लिए उनका पंजीकरण करेंगे।"

उन्होंने कहा, "प्रवेश और निकास के लिए अलग सड़कें होंगी, केबल कार लगाए जाएंगे और हम 100 हेलीपैड बनाने पर विचार कर रहे हैं, जो कि आपदा के समय मददगार साबित होंगे।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 जुलाई की आपदा के बाद से अब तक 4,500 लोगों के लापता होने की सूचना है।

उन्होंने कहा, "हमने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से तीर्थयात्रियों की सूची भेजने को कहा है। हमने लोगों का पता लगाने के लिए आपदा से एक महीने तक की अवधि निर्धारित की थी, जो अवधि पूरी हो चुकी है।"

उन्होंने कहा, "अब मैं कह सकता हूं कि उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। हम उत्तराखंड में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर बनाई गई अपनी सूची का अन्य राज्यों की सूची से मिलान करेंगे और उसके बाद मृतकों का सही आंकड़ा सामने आएगा।"

मुआवजे के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये, अन्य राज्यों के मृतकों के परिवार वालों को साढ़े तीन लाख रुपये दिए जाएंगे।

बहुगुणा को आशंका है कि केदारनाथ कस्बे में जमे मलबे और कीचड़ के नीचे और शव दबे हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, "पूरा मलबा सख्त हो गया है और लगातार हो रही बारिश की वजह से साफ-सफाई का काम बाधित हो रहा है।"

बहुगुणा के मुताबिक डीएनए के नमूने और घड़ी, ईयररिंग व शवों से मिले अन्य चीजों को संरक्षित कर रखा गया है।

बहुगुणा ने कहा, "हम उन्हें उत्तराखंड की वेबसाइट पर डालेंगे, ताकि रिश्तेदार उन्हें पहचान सकें और उन पर दावेदारी कर सकें। करीबी संबंधियों को मिलान के लिए अपने डीएनए नमूने देने पड़ेंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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