केदारनाथ मंदिर तक बन सकता है रोपवे

देहरादून: उत्तराखंड सरकार केदारनाथ तक रोपवे बनाने की संभावनाओं की तलाश कर रही है। यह जानकारी एक अधिकारी ने मंगलवार को दी।

अधिकारियों ने केदारनाथ के आधार शिविर गौरीकुंड से 14 किलोमीटर दूर इस तीर्थस्थल तक रोपवे बनाने की संभावना पर विचार-विमर्श किया।

केंदीय योजना राज्यमंत्री और संसदीय कार्यमंत्री राजीव शुक्ला ने इस योजना पर अपनी सहमति दी है जिससे रोपवे के जरिए तीर्थयात्री केदारनाथ तक आसानी से पहुंच पाएंगे।

पिछले महीने अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की वजह से गौरीकुंड, रामबाड़ा और केदारनाथ के बीच सम्पर्क टूट गया है।

अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "तीर्थस्थल का नवीनीकरण करते समय तकनीकी पक्ष और बारिश व अन्य प्राकृतिक आपदा के खतरों का ख्याल रखा जाएगा।"

वैकल्पिक रास्ता तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को बढ़ाएगा और दूरी को कम करेगा।

केदारनाथ इलाके के पुनर्निर्माण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से सम्पर्क किया गया है।

बारिश की वजह से राहत कार्य में बाधा आ रही है और आसमान अगले महीने तक ही साफ हो सकेगा जिससे पुनर्निर्माण का कार्य अक्टूबर तक ही शुरू हो पाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "आखिरी फैसला लेने से पहले लागत, रोपवे के तकनीकी पक्ष और सुरक्षा मानक पर विचार किया जाएगा।"

सरकार द्वारा उत्तराखंड में दो रोपवे चल रही हैं जो पुरानागिरी और यमुनोत्री में हैं।

जानकीचट्टी से यमुनोत्री के बीच 3.84 किलोमीटर के रोपवे में 70 करोड़ रुपये और थालिगड़-पुरानागिरी के बीच लगभग एक किलोमीटर के रोपवे बनाने में 35 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

अल्मोड़ा में बिंसार रोड से केसर देवी मंदिर, ऋषिकेष से कुंजापुरी, स्नो व्यू से नैनीताल जू, चक्राता से टाइगर फॉल्स और दयारा बुग्याल में रोपवे बनाने के लिए अध्ययन किया गया है।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को 15 दिन के अंदर चार धाम यात्रा के क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करने के आदेश दिए गए हैं।

राष्ट्रीय आपदा कार्रवाई बल (एनडीआरएफ) की खुदाई एवं अन्य कार्यो की मशीनें गुप्तकाशी और रुद्रप्रयाग जिला पहुंच गई हैं।

मौसम के अनुकुल रहने पर केदारनाथ तीर्थस्थल में इसके जरिए मलबे के नीचे फंसे शवों को हटाने का काम किया जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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