अब मादा गंध से पकड़े जाएंगे नर कीट

लखनऊ, 16 मार्च (आईएएनएस/आईपीएन)। हानिकारक कीटों से फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को अब कीटनाशकों के छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब फसलों के असली दुश्मन नर कीटों को खेतों में फेरोमेन ट्रैप लगाकर पकड़ा जा सकता है।

फेरोमेन ट्रैप को नर पतंगों को फंसाने के काम में लाया जाता है। यह ट्रैप प्लास्टिक का बना होता है, जिसमें कीप के आकार के मुख्य भाग पर लगे ढक्कन के बीच में मादा कीट की गंधयुक्त ल्यूर लगाया जाता है। इसी गंध से आकर्षित होकर नर पतंगे कीप के निचले हिस्से में लगे पॉलीथिन में फंस जाते हैं।

अभी तक फसल को हानि पहुंचाने वाले कीटों से बचाने के लिए अमूमन कीटनाशक रसायनों का ही छिड़काव किया जाता रहा है। लेकिन ये फसलों के साथ-साथ मानव के लिए भी हानिकारक है।

उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर फेरोमेन ट्रैप को आजमाया जा चुका है। फेरोमेन ट्रैप में नर कीट फंस जाते हैं और इस तरह कीटों की वंशवृद्धि रुक जाती है।

विभिन्न प्रकार के नर कीटों, जैसे चने की फली का बेधक, तंबाकू कीट, भिंडी का चित्तीदार कीट, कपास का गुलाबी कीट, धान का तनाबेधक, बैंगन का फली व कलंकी का बेधक और फलमक्खी को आकर्षित करने के लिए ल्यूर बाजार में उपलब्ध है।

फेरोमेन ट्रैप को खेत में फसल की ऊंचाई से लगभग दो फीट ऊपर रखते हुए एक लकड़ी के डंडे में ट्रैप के हत्थे को बांध दिया जाता है। ल्यूर को ट्रैप के ढक्कन में लगा दिया जाता है। ल्यूर को 25 दिन बाद बदला जाता है। खेत में हानिकारक पतंगों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए 5-6 ट्रैप, और अधिक संख्या में नर कीट पतंगों को पकड़ने के लिए 15-20 ट्रैप प्रति हेक्टेयर लगाए जाते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कीट पतंगों से फसलों को बचाने के लिए फेरोमेन ट्रैप एक बेहतर उपाय है। इससे उपज भी प्रदूषित नहीं होती।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

POPULAR ON IBN7.IN