मुआवजा देने के संबंध में नीति स्पष्ट करने के निर्देश

लखनऊ, 12 मार्च (आईएएनएस)| इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हत्या के मामलों में मनमाने ढंग से अलग-अलग प्रकार से मुआवजा दिए जाने के सम्बन्ध में दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सरकार को दो सप्ताह में अपनी नीति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की तरफ से दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र की पीठ ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिए।

याचिका में ठाकुर द्वारा अदालत से निवेदन किया गया है कि जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतापगढ़ हत्याकांड के बाद पचास लाख और बीस-बीस लाख रुपये के मुआवजे तत्काल दे दिए, वहीं इस दौरान मारे गए तमाम लोगों को किसी भी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया। इनमें अम्बेडकर नगर के टांडा के हिंदू युवा वाहिनी के नेता रामबाबू गुप्ता सहित कई लोग शामिल हैं।

याचिका में आगे कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन का यह कार्य समानता के अधिकार के विपरीत है और उसे बिना किसी ठोस आधार के हत्या के विभिन्न मामलों में भेदभाव करने का अधिकार नहीं है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार हत्या के मामलों में शासकीय कर्मियों और अन्य लोगों के लिए हत्या के बाद मुआवजे के सम्बन्ध में एक स्पष्ट नीति बनाए। साथ ही इस दौरान हुई हत्या के सभी मामलों में उतनी ही धनराशि का मुआवजा प्रदान किया जाए, जितना कि प्रतापगढ़ कांड़ में किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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