उप्र में जेल के भीतर मजबूत होगा मुखबिर तंत्र!

लखनऊ, 11 मार्च (आईएएनएस/आईपीएन)। मशहूर फिल्म शोले में जेलर असरानी अपने खबरी और जेल के नाई हरिराम से कुछ इस तरह सवाल पूछता है, "क्या खबर लाए हो हरिराम..?" हरिराम जवाब कुछ इस तरह देता है, "साहब जेल में बंदी सुरंग बनाने वाले हैं और सुरंग बनाने का औजार भी जेल में आ चुका है।" कुछ इसी तरह उत्तर प्रदेश की जेलों में मुखबिर तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश मुख्यालय से जेल प्रशासन को पत्र भेजा गया है, जिसमें उनसे जेल के भीतर मुखबिर तंत्र मजबूत करने के लिए कहा गया है।

राज्य की जेलों में माफिया गिरोहों के बीच वर्चस्व को लेकर जंग होती रहती है। जेल प्रशासन को गुटबाजी की भनक न लगने के चलते कैदियों को बैरकों में स्थानांतरित भी नहीं किया जा पाता। इतना ही नहीं, कई घटनाओं को अंजाम देने के लिए जेलों में योजना भी तैयार की जाती है। पेशी पर गए बंदी लौटते समय अपने साथ मादक पदार्थ, मोबाइल का सिम तक लाने में सफल हो जाते हैं।

ऐसी घटनाओं के बारे में जानकारी रखने के लिए जेल मुख्यालय ने मुखबिर तंत्र विकसित करने का प्लान तैयार किया है। मुखबिर सीधे जेल अधीक्षक या जेलर को सूचना देंगे। उनके द्वारा दी गई सूचनाएं गोपनीय रखी जाएंगी।

मुखबिर तंत्र को गोपनीय रूप से प्रोत्साहित और पुरस्कृत भी किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक जेल अधीक्षक बंदियों, जेल के नाई, बंदी अभिभावकों, बंदी रक्षक, लोकल लॉकप वकील, सजायाफ्ता कैदियों, राइटर, नंबरदार आदि में किसी से भी सूचना तंत्र के रूप समय-समय पर खबरों का इनपुट लेते रहेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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