पीआईएल का दुरुपयोग रोकेंगे : ओझा

इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा ने कहा है कि उच्च न्यायालय में दाखिल होने वाली बेमतलब की जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को रोकने का प्रयास किया जाएगा, ताकि इससे अदालत का समय बर्बाद न हो।

उन्होंने साफतौर पर कहा कि उच्च न्यायालय में दायर होने वाली जनहित याचिकाओं की सुनवाई से पहले अच्छी तरह से स्क्रूटनिंग कराई जाएगी।

ओझा ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में उच्च न्यायालय के कई मसलों को लेकर विस्तार से बातचीत की।

न्यायालय में आए दिन दाखिल होने वाली जनहित याचिकाओं को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में ओझा ने कहा, "दरअसल समाज एक संक्रमण काल से गुजर रहा है। पीआईएल के माध्यम से भ्रष्टाचार के बहुत बड़े-बड़े मामलों पर कार्रवाई हुई है। इसका फायदा तो है ही, लेकिन इसी दौरान बहुत सारी पीआईएल ऐसी भी होती हैं, जिनका कोई मतलब नहीं होता और उनकी वजह से अदालत का वक्त जाया होता है।"

ओझा ने कहा, "निश्चित तौर पर पीआईएल दाखिल होने के बाद उसकी अच्छी तरह से जांच के बाद ही सुनवाई शुरू होनी चाहिए। इसे लेकर कार्यकारिणी के सदस्यों से बातचीत करूंगा।"

उन्होंने कहा कि पीआईएल को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने भी कड़ी गाइडलाइन जारी की है, जिस पर सख्ती से काम किया जाएगा।

ओझा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष बनने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता 'बेंच' और 'बार' के बीच अच्छी तरह से समन्वय स्थापित करना रहेगा, ताकि छोटी-छोटी समस्याओं से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की छोटी समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित पड़े मुकदमों को लेकर ओझा ने स्पष्ट कहा कि लंबित मामलों की सुनवाई को लेकर बैठक में चर्चा की जाएगी। कोशिश रहेगी कि अदालत में लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा कराया जा सके।

ओझा ने कहा, "यह तो सच है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या ज्यादा है। वर्तमान में मैं इसका सही आंकड़ा नहीं बता पाऊंगा, लेकिन इस दिशा में कारगर कदम उठाने की कोशिश करूंगा।"

यह पूछे जाने पर कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय व जिला अदालत परिसर में आए दिन सुरक्षा में चूक का मामला सामने आता रहता है, इसको लेकर क्या कदम उठाएंगे, ओझा ने कहा, "उच्च न्यायालय परिसर में सुरक्षा की व्यवस्था ठीक है, लेकिन जिला अदालत परिसर में इसमें अभी कमियां हैं। अदालत परिसर में फर्जी लोगों के प्रवेश पर नियंत्रण लगाने के लिए बायोमैट्रिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जल्द ही और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जाएगी।"

क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन यहां की सदस्यता लेने वाले नए अधिवक्ताओं की डिग्रियों का वेरिफिकेशन कराएगा, इस पर ओझा ने कहा, "निश्चित तौर पर यह महत्वपूर्ण है कि जो नए अधिवक्ता डिग्री लेकर इस प्रोफेशन में आ रहे हैं, उनकी डिग्रियों की जांच कराने के उपाय भी किए जाएंगे। सदस्यता से पहले अधिवक्ताओं की डिग्रियों का वेरिफिकेशन कराने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी।"

ओझा ने कहा कि बार एसोसिएशन की 17 जुलाई को होने वाली अगली कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्द को जरूर शामिल किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राधाकांत ओझा रविवार को ही बार ऐसोसियेशन के चुनाव में अध्यक्ष निर्वाचित हुये थे। उन्होंने अनिल तिवारी को 1012 मतों से हराया।

  • Agency: IANS