न भुलाने वाला गम भी दे गया महाकुंभ 2013

संगम (इलाहाबाद), 11 मार्च (आईएएनएस)| उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला 'महाकुंभ' संपन्न कराकर मेला प्रशासन भले ही चैन की सांस ले रहा हो लेकिन महाकुंभ-2013 अव्यवस्थाओं और हादसों के लिए भी जाना जाएगा। महाकुंभ मेले के दौरान करीब आठ करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य का लाभ कमाया। जनकल्याण के लिए अनेक धार्मिक अनुष्ठान भी हुए। बेटी, गाय, गंगा, यमुना के साथ शास्त्रों को बचाने की आवाज भी बुलंद हुई। बावजूद इसके, प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई कुछ दर्दनाक घटनाओं ने ऐसा दर्द दिया जो बहुत सालों तक याद रखा जाएगा।

मौनी अमावस्या के शाही स्नान के दिन (10 फरवरी) इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की भीड़ का रेला पहुंचने से भगदड़ मच गई, जिसमें 37 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। करीब चालीस श्रद्धालु घायल हो गए, जिनका अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

मौनी अमावस्या से शाही स्नान के दिन करीब साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु स्नान करने आए थे। राज्य सरकार और रेलवे की तरफ से इतनी बड़ी भीड़ को वापस भेजने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। स्टेशन पर क्षमता से ज्यादा भीड़ पहुंच गई और प्लेटफार्म नंबर आठ पर भीड़ का रेला आमने-सामने आ गया और भगदड़ मच गई। पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप भी लगा।

राज्य सरकार और रेलवे, दोनों हादसे की जिम्मेदारी लेने से बचते रहे। उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि घटना रेलवे की चूक की वजह से हुई। घटना की न्यायिक जांच कराई जा रही है।

25 जनवरी को महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर 11 में गैस सिलेंडर के रिसाव से लगी आग में पांच लोगों की मौत हो गई। 23 श्रद्धालु बुरी तरह झुलस गए। फिर 30 जनवरी को सेक्टर दो में आग से तीन दुकानें खाक हो गईं।

आग लगने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। वसंत पंचमी से एक दिन पहले 14 फरवरी को सेक्टर नौ स्थित विश्वेश्वरानंद के शिविर में शार्टसर्किट से लगी आग में 10 टेंट जल गए। इसमें एक श्रद्धालु की मौत हो गई।

वसंत पंचमी से शाही स्नान के बाद तेज बारिश होने के बाद तो पूरे मेले की सूरत ही बिगड़ गई। मौसम विभाग द्वारा एक सप्ताह पहले ही तेज बारिश की संभावना जताई गई थी, लेकिन मेला प्रशासन ने वक्त रहते बंदोबस्त नहीं किए।

दो दिन तक तेज बारिश के बाद तो पूरे मेला क्षेत्र में चारों तरफ जलभराव हो गया। सड़कें दलदल में बदल गईं। कल्पवासियों की झोपड़ियों में कमर तक पानी भर गया। प्रशासन की अनदेखी से नाराज करीब 50 हजार कल्पवासी बीच में ही अपना कल्पवास छोड़कर चले गए।

कल्पवास बीच में ही छोड़ने वाले एक कल्पवासी देवेंद्र दीक्षित ने कहा, "बारिश के बाद हमारी झोपड़ी में पानी भर गया। हमें किसी दूसरी वैकल्पिक जगह पर नहीं ले जाया गया। बदइंतजामी देखकर हमें कल्पवास अधूरा ही छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा।"

करीब एक सप्ताह तक मेला बदरंग रहा। लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने मेले के हालात देखकर अधिकारियों से जब नाराजगी दिखाई और सख्त निर्देश दिए तब जाकर मेले की रौनक वापस लाने के लिए युद्धस्तर पर कारवाई हुई।

कुंभ मेले के नोडल अधिकारी एवं इलाहाबाद के मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी कहते हैं कि जब किसी एक स्थान पर करोड़ों की संख्या में लोग एकत्र होते हैं तब ऐसा संभव नहीं है कि कोई अव्यवस्था न हो। मेला प्रशासन की तरफ से श्रद्धालुओं से सुचारु और सुविधाजनक स्नान के लिए हरसंभव कोशिशें की गईं।

उन्होंने कहा कि मेले में सुरक्षा, चिकित्सा, साफ -सफाई का खास ध्यान रखा गया। कुछ 'छोटी मोटी बातों' को छोड़ दिया जाए तो पूरा मेला बहुत सकुशल निपट गया।

मेले के दौरान तीन बार शाही स्नान पर्व में शिरकत करने वाले प्रतापगढ़ निवासी रतीपाल ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था ही एक ऐसी चीज थी जिसकी तारीफ की जा सकती है। बाकी हर जगह पर अव्यवस्था नजर आई।

मकर संक्रांति से शुरू महाकुंभ मेला 55 दिन चला और महाशिवरात्रि के दिन आखिरी शाही स्नान के साथ समापन हुआ। इलाहाबाद में महाकुंभ मेला 12 साल बाद लगा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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