जागरूक लोगों ने लिया आगरा की सफाई का जिम्मा

आगरा: हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करने वाले आगरा की गंदगी को लेकर स्थानीय और विदेशी पर्यटकों की नकारात्मक टिप्पणियों के कारण सामाजिक कार्यकर्ताओं, सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारियों और अन्य लोगों ने ताज महल वाले शहर को साफ करने की मुहिम की शुरुआत की है।

'इंडिया राइजिंग ग्रुप' की आधारशिला रखने वाले एक पूर्व सैनिक सुर्दशन दुआ ने आईएएनएस को बताया, "पूरा शहर दरुगध से भरा है। नालियां बहती हैं और गटर बंद हैं। लोगों को यह सीखने की जरूरत है कि साफ सुथरे वातावरण में कैसे रहा जाए और कचरे को वैज्ञानिक तरीके से किस प्रकार नष्ट किया जाए।"

नीली टोपी और टी शर्ट पहने समूह के सदस्यों ने कहा, "स्थानीय निवासियों के पास दो ही विकल्प हैं या तो अपनी मदद खुद करें या भगवान पर भरोसा रखें जो कभी नहीं होगा। "

समूह के नेता और पूर्व नासा वैज्ञानिक आनंद राय ने आईएएनएस को बताया, "फेसबुक पर आमंत्रण के बाद हर रविवार को हम एक जगह पर एकत्रित होते हैं और सारे इलाके की सफाई करते हैं।"

एक अन्य सदस्य के मुताबिक, "अपने हथियारों यानी झाड़ुओं, कुदालों और टोकरियों के साथ हम आते हैं और सफाई करते हैं। साथ ही दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिए सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट करते हैं। "

दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान की शुरुआत नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने या स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत से भी पहले मार्च 2014 में हुई थी।

समूह की शुरुआत शहर के संजय प्लेस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स से महज चार सदस्यों के साथ हुई थी।

सामाजिक कार्यकर्ता विवेक शर्मा के मुताबिक, "स्थानीय पर्यटन समितियां और बड़े होटल केवल शहर की संस्कृति का लाभ उठाते हैं, लेकिन बदले में वे कुछ नहीं करते।"

अधिकारियों के मुताबिक, हर रोज आगरा में 500 मिट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्रित होता है। इसके अलावा फैक्टरियों से निकलने वाले कचरे को मिलाकर हर रोज करीब 750 टन से ज्यादा कचरा पैदा होता है।

कार्यकर्ता श्रवण कुमार सिंह ने कहा, "एक महीने के दौरान 4,000 अतिक्रमणों को नष्ट करने के कारण पैदा हुआ मलबा फिलहाल सबसे बड़ी समस्या है। "

आगरा नगर निगम के अधिकरियों का कहना है कि वे उन्हें मिली अनुमति के दायरे में अपना काम कर रहे हैं।

यूनियन नेता हरीश सिंह के मुताबिक, "हर रोज निकलने वाले कचरे की तुलना में सफाई कर्मचारी बेहद कम हैं।"

एक अधिकारी ने कहा, "कचरा डालने के मैदान भर चुके हैं और हम नई जगहों की तलाश कर रहे हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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