ताजमहल के पास पेड़ों की कटाई प्रतिबंधित

आगरा: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि ताज महल के पास पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में किसी भी तरह के अनधिकृत निर्माण को अनुमति न दी जाए और न ही पेड़ों को काटा जाए। एनजीटी ने सोमवार को अपने अंतरिम आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह वन भूमि की सीमाएं निर्धारित करे और मथुरा, फिरोजाबाद और आगरा के ताज चतुर्भुज क्षेत्र के 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले वन क्षेत्रों को आरक्षित करे।

एनजीटी ने यह निर्देश एम.सी. मेहता की रपट की प्रतिक्रिया में दिया है। एनजीटी द्वारा नियुक्त आयुक्त एम.सी. मेहता आयोग ने अपनी अंतरिम रपट में कहा है कि एक प्रारंभिक सर्वेक्षण दर्शाता है कि ताजमहल के आस-पास के इलाके में वन क्षेत्र को हटाया जा रहा है।

एनजीटी ने कहा, "आयुक्त ने आगे कहा है कि वनों की कटाई से प्रभावित क्षेत्र ताज चतुर्भुज क्षेत्र के 500 मीटर के दायरे में आता है। इस बात को रपट में विशेष रूप से बताया गया है कि बिल्डरों ने इस क्षेत्र में और यहां तक कि यमुना नदी के तट पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।"

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने ताजमहल के संवेदनशील क्षेत्र के गलत प्रबंधन और यमुना तट पर निर्माण कार्य की अनुमति देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की खिंचाई की।

मथुरा की ब्रज बचाओ समिति ने बाढ़ के क्षेत्र में निर्मित सभी इमारतों को ध्वस्त करने के लिए मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण को एक ज्ञापन सौंपा है।

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