आगरा में बीजेपी के खिलाफ आरएसएस नेता ने किया नामांकन, सपा से आए नेता को टिकट मिलने से नाराज

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में आगरा की फतेहाबाद सीट पर राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने होंगे। बुधवार को आरएसएस नेता ब्रज किशोर लावनिया ने नामांकन दाखिल किया है। लावनिया ने ऐसा पार्टी नेतृत्‍व के कैडर कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करने और एक बाहरी को टिकट देने के विरोध में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। बीजेपी ने उन्‍हें टिकट देने से मना कर दिया था और सपा के पूर्व जिलाध्‍यक्ष जितेंद्र वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। लावनिया बतौर निर्दलीय उम्‍मीदवार चुनाव में ताल ठोकेंगे। वे संघ और उसकी सहयोगी संगठनों से 1988 से जुड़े रहे हैं। उन्‍होंने पिछले 10 साल तक विश्‍व हिंदू परिषद (विहिप) के जिला सचिव के तौर पर काम किया है। इससे पहले, वह 8 साल तक बजरंग दल के जिला संयोजक रहे थे। बजरंग दल की जिम्‍मेदारी संभालने से पहले वह सात साल तक आरएसएस के ‘शाखा कार्यवाह’ और ‘मंडल कार्यवाह’ भी रह चुके हैं। पिछले साल, विहिप नेता अरुण महौर की मौत पर शोक-सभा के दौरान भड़काऊ बयान देने के लिए लावनिया पर मुकदमा दर्ज किया गया था। महौर को कथित तौर पर दूसरे समुदाय के लोगों ने आगरा में मौत के घाट उतार दिया था। इस संबंध में मार्च 2016 में लोह मंडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

लावनिया ने टिकट वितरण से स्‍थानीय कार्यकर्ताओं को नाखुश बताते हुए कहा, ”मैं निर्दलीय उम्‍मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहा हूं, बीजेपी के खिलाफ नहीं बल्कि बीजेपी नेतृत्‍व के फैसले के खिलाफ, जिसने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया और एक बाहरी को टिकट दे दिया।”

लावनिया ने कहा कि उन्‍होंने 2012 विधानसभा चुनावों में भी टिकट मांगा था। मगर अयोध्‍या के बाबरी विध्‍वंस की वर्षगांठ पर शौर्य दिवस मनाने के लिए 2011 में उन्‍हें दो महीने के लिए जेल भेजा गया था। जिसके चलते उनकी अप्लिकेशन वरिष्‍ठ भाजपा नेताओं तक नहीं पहुंच सकी। लावनिया ने कहा कि वह हिंदुत्‍व एजेंडा पर चुनाव लड़ेंगे। उन्‍होंने दावा किया, ”मैं लोगों से वादा करूंगा कि अगर मुझे चुना गया तो मैं फतेहाबाद में राम राज्‍य कायम कर दूंगा।”

लावनिया का नारा भी राम राज्‍य पर आधारित है। उनका नारा है- ”नहीं जात पात के नाम पर, वोट राम राज्‍य के नाम पर।” एक बीजेपी नेता ने कहा, ”लावनिया का चुनाव लड़ना बीजेपी उम्‍मीदवारों के वोटों को प्रभावित कर सकता है क्‍योंकि वह क्षेत्र में लंबे समय तक आरएसएस के व्‍यक्ति के रूप में रहे हैं, और उन्‍हें उनकी हिंदुत्‍ववादी छवि के लिए जाना जाता है। ब्रज में, आरएसएस गतिविधियों के चलते भाजपा को अच्‍छे-खासे वोट मिलते हैं।

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