आगरा में तस्करों के कब्जे से उल्लू बरामद

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में उल्लुओं का अवैध कारोबार करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। यह भंडाफोड़ प्रकृति की तस्वीरें खींचने वाले एक फोटोग्राफर के गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) 'वाइल्डलाइफ एसओएस' को दी गई सूचना के बाद हो पाया। फोटोग्राफर अंकुश दवे ने बताया, "मैं कई महीनों से पठोली गांव में उल्लुओं और नवजात पक्षियों पर गौर कर रहा था। मैंने इलाके में संदिग्ध लोगों के एक गिरोह को घूमते देखा। उनके हाथ में एक थैला था। मैंने उनसे पूछताछ करने का फैसला किया। उन्होंने उनके पास एक उल्लू होने की बात कबूली। मैंने उसके बाद तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस से संपर्क किया।"

वाइल्डलाइफ एसओएस वन्यजीवों की रक्षा करने वाली एक गैर सरकारी संस्था है।

दवे ने कहा कि सूचना मिलने के बाद एनजीओ के बचाव केंद्र की एक टीम मौके पर पहुंची और तस्करों की कैद से उल्लू को मुक्त कराया। तस्कर समूह उल्लू को चिकित्सा व तंत्र-मंत्र के लिए बेचने की तैयारी में थे।

उन्होंने कहा कि तस्करों ने उल्लू के नाखून कुतर दिए हैं। वह अब वाइल्डलाइफ एसओएस के बचाव केंद्र की निगरानी में है।

वाइल्डलाइफ एसओएस की बचाव इकाई के सदस्य साकिर ने कहा, "हमने तस्कर गिरोह को पुलिस के हवाले करने की धमकी दी, इसके बावजूद उन्होंने उल्लू को हमें सौंपने से इनकार कर दिया। हमने जब जिला मजिस्ट्रेट को सूचना दी, तब जाकर उन्होंने उसे हमें सौंपा।"

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और एनजीओ की शिकार रोधी इकाई 'फोरेस्ट वॉच' के प्रमुख कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, "वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत उल्लुओं के शिकार व उनकी खरीद-फरोख्त पर रोक है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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