त्रिपुरा में मौजूद मिजोरम के शरणार्थी करेंगे मतदान

अगरतला/आइजोल: मिजोरम के गांव से 16 साल पहले भागकर त्रिपुरा में सात शिविरों में रह रहे रेआंग आदिवासी शरणार्थी अपने राज्य में डाक के जरिए मतदान कर सकेंगे। यहां चार दिसंबर को विधानसभा चुनाव होने वाला है। उत्तरी त्रिपुरा कंचनपुर उप प्रमंडल के उपसमाहर्ता अनुपम चक्रबर्ती ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "उत्तरी त्रिपुरा के सभी सातों शिविरों में मतदान केंद्र बनाया जाएगा, ताकि योग्य मतदाता मिजोरम चुनाव के लिए मतदान कर सकें।"

उन्होंने कहा, "भारतीय निर्वाचन आयोग (ईएसआई) के दिशा-निर्देश के अनुसार, मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। आयोग इन केंद्रों के कार्य का निरीक्षण करेगी। त्रिपुरा सरकार संभवत: इन केंद्रों को सुरक्षा जैसी सहायता मुहैया करा सकती है।"

ईसीआई के महानिदेशक आशीष श्रीवास्तव, मिजोरम के मुख्य निर्वाचन आयुक्त अश्विनी कुमार और राज्य के अन्य अधिकारियों ने मतदान की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए उत्तरी त्रिपुरा के शिविरों का दौरा किया।

कंचनपुरा और पानीसागर में 1997 से रह रहे 37,625 रेआंग आदिवासी शरणार्थियों में से 11,311 का नाम ही मतदाता सूची में दर्ज है। इन आदिवासियों को स्थानीय इलाके में 'ब्रू' के रूप में जाना जाता है।

शरणार्थी नेताओं ने श्रीवास्तव से शिकायत की थी कि कई योग्य मतदाताओं को मिजोरम की मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है।

मिजोरम के निर्वाचन विभाग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "ईसीआई के निर्देशों के अनुसार, मिजोरम के तीन जिले-मैमित, लुंग्लेई और कोलासिब जल्द ही मतदाता सूची में योग्य तमदाताओं के नाम शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू करेंगे।

दो वर्षो के अंतराल के बाद 30 सितंबर को उनके अपने राज्य जाने का सिलसिला फिर शुरू हुआ। 90 परिवारों के लगभग 600 लोग पश्चिमी मिजोरम स्थित अपने घर लौटे हैं।

ये आदिवासी एक मिजो वन्य अधिकारी की हत्या की घटना पर बहुसंख्यक मिजो नागरिकों के साथ हुए जातीय संघर्ष के बाद अक्टूबर 1997 में अपना घर छोड़कर यहां आ गए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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