त्रिपुरा की जनजातीय समुदायों की पार्टियां दिल्ली में करेंगी प्रदर्शन

 

अगरतला:  वाम मोर्चा शासित त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में अभी एक साल शेष है, लेकिन जनजाति आधारित पार्टियों ने एक अलग राज्य सहित अपनी कई मांगों के समर्थन में दबाव बनाने को लेकर गतिविधियां शुरू कर दी हैं। जनजाति आधारित दो राजनीतिक पार्टियां, इंडिजनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) तथा इंडिजनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) अपनी मांगों के समर्थन में केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए 'दिल्ली अभियान' (दिल्ली मार्च) आयोजित करेंगी।

आईएनपीटी के प्रवक्ता राजन खीसा ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "अपनी आठ सूत्री मांगों के समर्थन में 21 फरवरी को आईएनपीटी के नेता जंतर-मंतर पर छह घंटे तक धरना देंगे।"

उनकी मांगों में संवैधानिक निर्वाचित निकाय त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) को अधिक शक्ति प्रदान करना, देशज जनजातियों के संरक्षण के लिए इनर लाइन परमिट विनियमन की घोषणा करना व जनजाति भाषा 'कोकबोरोक'को संविधान की आठवीं अनुसूची के तहत मान्यता प्रदान करना, 60 सदस्यों वाली त्रिपुरा विधानसभा में जनजातियों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित करना शामिल हैं।

आईपीएफटी बीते कुछ वर्षो से टीटीएएडीसी को अपग्रेड कर एक अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलनरत है। टीटीएएडीसी का गठन 1987 में संविधान की छठी अनुसूची के तहत जनजातियों की राजनीतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक हितों की सुरक्षा के लिए किया गया था।

आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेंद्र चंद्र देबबर्मन ने आईएएनएस से कहा, "दिल्ली में 28 फरवरी से हम तीन दिवसीय धरने की शुरुआत करेंगे। हमने प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से मंजूरी मांगी है, लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं मिला है।"

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