त्रिपुरा : विधायकों की मांग, जनधन खातों की जांच हो

 

अगरतला:  त्रिपुरा की बैंकों में प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के खातों में जमा भारी राशि पर राज्य के विधायक जांच की मांग कर रहे हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, त्रिपुरा के 501 बैंकों की शाखाओं में 8,30,742 जनधन योजना के खातों में 1,15,000 में आठ नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा तक शून्य राशि थी।

यूबीआई के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर सोमवार को बताया, "इन खातों में आठ नवंबर के बाद 227 करोड़ रुपये डाले गए और अब तक इन खातों में 654 करोड़ रुपये की रकम जमा की जा चुकी है।"

त्रिपुरा विधानसभा में चल रहे शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे पर जबरदस्त बहस हुई थी और विपक्षी दल के विधायक ने इसकी जांच की मांग की है।

पूर्व विपक्षी नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रतनलाल नाथ ने कहा, "यह अत्यंत रहस्यमय है कि कैसे यह राशि त्रिपुरा के पीएमजेडीवाई खातों में जमा की गई। यह योजना गरीबों, महिलाओं और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए है।"

उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक को इसकी पूछताछ करनी होगा कि कैसे इतनी बड़ी राशि पीएमजेडीवाई खातों में जमा की गई।"

रतनलाल नाथ ने कहा, "कर चोरी के लिए कुछ लोगों ने बैंक अधिकारियों के एक वर्ग की मदद से इन पीएमजेडीवाई खातों में अपना बेहिसाब पैसा जमा कराया होगा।"

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों में आदिवासियों को आयकर भुगतान से छूट दी गई है, सरकार को इस बारे में जांच करनी चाहिए कि इस योजना के दुरुपयोग से कालेधन को सफेद धन के रूप में समायोजित किया जा रहा है।

ग्रामीण, दूरस्थ और गैर-बैंकिंग क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिकता देने के लिए पीएमजेडीवाई खातों को 50,000 रुपये की राशि जमा की सीमा के साथ 28 अगस्त, 2014 को शुरू किया गया था।

बैंक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना वित्तीय समावेशन में देश के सभी परिवारों को शामिल करने का एक राष्ट्रीय मिशन है, ताकि उन तक वित्तीय सेवाओं जैसे बैंकिंग, जमा खातों, प्रेषण, ऋण, बीमा और पेंशन आदि की पहुंच को एक किफायती ढंग से सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने बताया, "पीएमजेडीवाई के तहत बैंक खातों को बेसिक बचत बैंक जमा खाता के रूप में समझा जाता है, जिसमें खाता खोलने के दौरान किसी न्यूनतम शेष राशि की जरूरत नहीं होती है।"

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